युवा लेखक अनुरुद्ध कुमार शास्त्री का उपन्यास मलहेरी प्रकाशित
साहित्य जगत में चर्चा
- प्रकाशन के मात्र 5वें दिन एमेजॉन बेस्ट सेलर सूची में 211वें स्थान पर पहुंची कृति
मंडला महावीर न्यूज 29. हिंदी साहित्य जगत में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में युवा लेखक एवं कवि अनुरुद्ध कुमार शास्त्री का बहुप्रतीक्षित उपन्यास मलहेरी प्रकाशित हो गया है। सामाजिक यथार्थ, श्रमिक जीवन के संघर्ष, ग्रामीण परिवेश की संवेदनाओं और सपनों के लिए संघर्षरत युवाओं की कथा को समेटे यह उपन्यास पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रकाशन के मात्र पांचवें दिन ही यह उपन्यास एमेजॉन की बेस्ट सेलर सूची में 211वें स्थान पर पहुंच गया है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद साहित्य और समाज को चुना
उपन्यास के लेखक अनुरुद्ध कुमार शास्त्री मूलत: एनआईटी भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने साहित्य और सामाजिक सरोकारों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। वर्तमान में वे आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के विकासखंड निवास में प्रदान संस्था में कार्यरत हैं। वे लंबे समय से समाज के उस वर्ग की पीड़ा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति दे रहे हैं, जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चाओं से दूर रह जाता है।
वैश्विक पटल पर 150 से अधिक देशों में उपलब्ध
बताया गया कि प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान नोशन प्रेस द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अब एमेजॉन, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से विश्व के 150 से अधिक देशों में उपलब्ध है। हिंदी भाषा में लिखी गई इस कृति का वैश्विक स्तर पर इस तरह पहुंचना मंडला जिले के साथ हिंदी साहित्य के लिए भी गर्व का विषय है।
यह है मलहेरी का कथानक
लेखक अनुरुद्ध कुमार शास्त्री ने बताया कि मलहेरी का मुख्य कथानक संघर्ष, श्रम, शिक्षा और आत्मसम्मान के इर्द-गिर्द घूमता है। यह केवल एक पात्र की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों मेहनतकश लोगों के जीवन का प्रतिबिंब है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा साहित्य समाज का दर्पण है और लेखक का दायित्व केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि उन आवाज़ों को मंच देना भी है जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। साहित्य प्रेमियों और समीक्षकों का मानना है कि अपनी सरल भाषा, जीवंत पात्रों और भावनात्मक गहराई के कारण मलहेरी समकालीन हिंदी साहित्य में अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी।










