मवई में डिजिटल इंडिया की हवा निकाल रहा लचर नेटवर्क
बिजली गुल होते ही ठप हो रहीं बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाएं
- 50 गांवों के ग्रामीण बेहाल, व्यापारियों को भारी नुकसान
- मवई मुख्यालय में संचार व्यवस्था ध्वस्त
- हाट-बाजार के दिन बिना खाद-बीज खरीदे खाली हाथ लौटे किसान
मवई जनपद मुख्यालय में नेटवर्क का बड़ा संकट
बिजली कटते ही बंद हो रहे मोबाइल टावर, ऑनलाइन सेवाएं और बैंकिंग पूरी तरह ठप
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के जनपद मुख्यालय मवई और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले करीब एक सप्ताह से नेटवर्क का गंभीर संकट बना हुआ है। इस तकनीकी समस्या के कारण समूचे क्षेत्र में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। सरकारी दफ्तरों से लेकर आम नागरिकों के रोजमर्रा के जरूरी काम पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। स्थानीय स्तर पर संचार व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है, जिससे शासन-प्रशासन के ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों की जमीनी हकीकत उजागर हो रही है।
बिजली जाते ही गायब हो जाता है सिग्नल
स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं के अनुसार, मवई मुख्यालय क्षेत्र में संचार और इंटरनेट का प्रमुख माध्यम जिओ (Jio) नेटवर्क है। लेकिन पिछले सात दिनों से यह नेटवर्क पूरी तरह से बिजली की आंख-मिचौली पर निर्भर हो चुका है। जब तक बिजली की आपूर्ति चालू रहती है, तब तक मोबाइल में सिग्नल दिखाई देते हैं। लेकिन जैसे ही बिजली कटौती होती है या तकनीकी खराबी के कारण बिजली गुल होती है, वैसे ही मोबाइल टावर भी काम करना बंद कर देते हैं। इससे पूरा विकासखंड क्षेत्र अचानक दुनिया से कट जाता है और आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोग किसी से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
हाट-बाजार के दिन फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
मवई ब्लॉक का मुख्य केंद्र होने के कारण यहाँ प्रतिदिन दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों लोग अपने प्रशासनिक और निजी कार्यों के लिए आते हैं। बीते दिन मवई का साप्ताहिक हाट-बाजार था, जिसमें लगभग 40 से 50 गांवों के हजारों ग्रामीण और किसान अपनी जरूरत का सामान खरीदने पहुंचे थे। खेती का सीजन शुरू होने के कारण अधिकांश किसान बैंकों से पैसा निकालकर खाद, बीज और कृषि उपकरण खरीदने की तैयारी में थे।
परंतु, सुबह से ही नेटवर्क गायब रहने के कारण बैंकों में लिंक फेल रही और ऑनलाइन कियोस्क सेंटर्स पर अंगूठे के निशान (बायोमेट्रिक) काम नहीं कर रहे थे। इसके चलते ग्रामीण बैंकों और एटीएम से नगद राशि नहीं निकाल पाए। पैसों के अभाव में सैकड़ों किसानों को बिना खाद-बीज खरीदे ही खाली हाथ अपने गांवों की ओर वापस लौटना पड़ा।
व्यापारियों को उठाना पड़ा भारी आर्थिक नुकसान
इस नेटवर्क संकट की सबसे बड़ी मार स्थानीय छोटे और बड़े व्यापारियों पर पड़ी है। वर्तमान समय में अधिकांश ग्राहक सामग्री खरीदने के बाद ऑनलाइन यूपीआई (UPI) या क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल भुगतान करते हैं। इंटरनेट पूरी तरह बंद होने के कारण दिन भर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन फेल होते रहे। मोबाइल दुकानदार, किराना व्यापारी और अन्य व्यवसायी दिनभर दुकानों में ग्राहकों का इंतजार करते रहे, लेकिन डिजिटल पेमेंट न होने की वजह से व्यापार ठप रहा। स्थानीय जागरूक नागरिकों, किसानों और व्यापारी संघ ने संबंधित दूरसंचार कंपनी तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि टावरों में पावर बैकअप (जनरेटर/बैटरी) की मुकम्मल व्यवस्था की जाए ताकि बिजली कटने पर भी नेटवर्क बाधित न हो और जनजीवन सुचारू रूप से चल सके।
रिपोर्टर- संदीप श्रीवास, मवई









