ऑपरेशन मानसून- एक हजार कर्मचारी और 17 हाथी संभाल रहे जंगल की सुरक्षा
कान्हा पार्क में घुसपैठ रोकने चल रहा ऑपरेशन मानसून
- 30 सितंबर तक चलेगा अभियान, 01 अक्टूबर से शुरू होगा कान्हा पार्क
- कान्हा में वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए कर्मचारी, श्रमिकों की नजर
- घुसपैठ ना हो इसलिए कर्मचारी, श्रमिक चौकन्ने
मंडला महावीर न्यूज 29. ख्यातिलब्ध कान्हा नेशनल पार्क में रैनी सीजन में तीन माह के लिए पर्यटन बंद रहता है, रैनी सीजन के चलते पर्यटकों का आना नहीं होता है। कान्हा पार्क 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटन के लिए बंद रहता है। इसके बाद 01 अक्टूबर से फिर कान्हा पार्क में पर्यटन शुरू किया जाता है। तीन माह पर्यटको को वनराज के दीदार नही होते है। रैनी सीजन में जंगल और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन मानसून चलाया जाता है। इस दौरान जंगल के चप्पे-चप्पे पर विभाग के अधिकारी, कर्मचारी नजर बनाए रखते है। विभाग के अमला और अधिकारियों की गश्त पूरे रैनी सीजन रहती है। बताया गया कि करीब 350 कर्मचारियों की कैंपों में तैनाती है। इसके साथ ही कान्हा के सभी अधिकारी और कर्मचारी मिलाकर करीब 1 हजार का स्टाफ जंगल की सुरक्षा में ऑपरेशन मानसून के तहत गश्त कर रहा है। यह ऑपरेशन 1 जुलाई से शुरू हुआ है और 30 सितंबर तक चलेगा।
जानकारी अनुसार विश्व की सबसे बड़ी जैव विविधता की प्रयोगशाला राष्ट्रीय उद्यान कान्हा है। जहां पर हर प्रकार के जीव जंतु वनस्पति वनों से आच्छादित है। दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु एवं वन्य प्राणी की उपलब्धता है। राष्ट्रीय उद्यान कान्हा के नाम से मंडला जिले को पूरी दुनिया में जाना जाता है। कान्हा नेशनल पार्क भारत के मध्यप्रदेश में मंडला और बालाघाट जिले की सीमा कान्हा में स्थित है। 1930 के दशक में कान्हा क्षेत्र को दो अभ्यारण्यों में बांटा गया था, हालोन और बंजर। जिसका एरिया 250 और 300 वर्ग किलोमीटर था। वहीं कान्हा नेशनल पार्क का अब विस्तार हो चुका है। अब कान्हा क्षेत्र में कोर 940, बफर 1134 और फेन 110 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
बताया गया कि कोर, बफर और फेन में पेट्रोलिंग कैंप है लेकिन बारिश के चलते मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाते है। झाडिय़ां बढ़ जाती है। दुर्गम स्थानों पर वाहनों से नही जाया जा सकता है। इस स्थिति में वन्यप्राणियों के शिकार, अवैध कटाई, अतिक्रमण और अवैध चराई की संभावना बढ़ जाती है। कान्हा में वन्यप्राणियों और उनके आवास की सुरक्षा के लिए कान्हा प्रबंधन के द्वारा ऑपरेशन मानसून 1 जुलाई से 30 सितम्बर तक चलाया जाता है। इस विशेष अभियान में कान्हा के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा जंगल की गश्ती की जा रही है। जिससे जंगल में बाहरी और शिकारियों की घुसपैठ को रोका जा सके।
कान्हा पार्क के संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर
मानसून के आगमन के साथ ही कान्हा राष्ट्रय उद्यान में ऑपरेशन मानसून के तहत व्यापक तैयारियां की गई हैं। बारिश के दौरान मार्ग क्षतिग्रस्त होने और दुर्गम पहाडिय़ों तक वाहनों की पहुंच मुश्किल होने के कारण कान्हा प्रबंधन ने वन और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है। ऑपरेशन मानसून के अंतर्गत कान्हा के 941 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया में 120 कैंप, 1134 वर्ग किलोमीटर बफर में 50 कैंप और 110 वर्ग किलोमीटर फेन अभ्यारण में 12 पेट्रोलिंग कैंप सहित कुल 182 कैंप स्थापित किए गए हैं। इन कैंपों में तैनात वनरक्षक और स्थायी सुरक्षा श्रमिक लगातार पैदल गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए रोस्टर और रूट चार्ट तैयार किए गए हैं जिससे जंगल में पेट्रोलिंग व्यवस्थित तरीके से हो सके। पेट्रोलिंग के दौरान पगडंडियों का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है और घुसपैठ की संभावनाओं की जांच की जा रही है। छप्परों की भी जांच की जा रही है और संवेदनशील इलाकों की विशेष निगरानी की जा रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व में 589 संवेदनशील इलाके हैं, जिन्हें 38 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। इन इलाकों में 160 पगडंडियां और 1204 किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है, जहां कैंपों में तैनात कर्मचारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ ऐसे इलाके भी हैं जहां पहुंचने में समय लगता है, जिसके लिए अस्थायी कैंप भी बनाए गए हैं, जहां एक वनरक्षक और दो सुरक्षा श्रमिक तैनात रहते हैं।
कान्हा के विभागीय हाथियों से गश्ती
गश्ती लिए रोस्टर तैयार किया जाता है। जिसमें अधिकारी, कर्मचारियों के दिन निर्धारित किये गये है। गश्त की सुरक्षा के लिए बनाये गये प्लान के अनुसार गश्ती का प्रतिवेदन रोजाना मुख्यालय भेजा रहा है। जिससे गश्ती में लापरवाही ना हो पाये। कान्हा नेशनल पार्क में पैदल और हाथियों के सहारे गश्ती की जा रही है। कान्हा में 17 विभागीय हाथी है। इस साल कान्हा, किसली, मुक्की और सूपखार क्षेत्र में हाथियों से गश्ती की जा रही है।
कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ख्याल
कान्हा नेशनल पार्क में बारिश के दौरान नमी, मच्छर और दूषित पानी पीने के कारण मलेरिया, पीलिया, गेस्ट्रोराइटिस बीमारी फैलन की संभावना रहती है। कर्मचारियों को पानी उबालकर पीने, मच्छरदानी का उपयोग और प्राथमिक उपचार के लिए दवाईयों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए माह में हर परिक्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाता है।
01 अक्टूबर से फिर पर्यटन
बारिश के बाद 1 अक्टूबर से कान्हा मे पर्यटन शुरू कर दिया जाएगा। जिस जोन में सड़क तैयार हो जाएगी और पयर्टन में आसानी होगी, वहां पर्यटन कराया जाएगा। 15 अक्टूबर से बारिश के आसार नहीं रहते है। जिससे 16 अक्टूबर से कोर एरिया के सभी जोन में पर्यटन चालू हो जाएगा। कान्हा नेशनल पार्क में बाघ के दीदार के लिए देशी-विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में आते है। यहां बारिश के तीन माह पर्यटन बंद रहता है। बारिश के कारण पार्क में मार्ग खराब हो जाते है। जिससे आवागमन संभव नहीं हो पाता है। जंगल में प्रवेश करना खतरे से खाली नहीं होता। वन्य प्राणी व जीव जंतु का भी खतरा बना रहता है। वन्यप्राणियो के प्रजननकाल का भी समय यही रहता है। जिससे बारिश के सीजन में पर्यटन प्रतिबंधित किया जाता है।










