भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जनमन योजना
समय से पहले काम खत्म करने की होड़ में गुणवत्ता भूली कंपनी
- 20 दिन पहले बनी सड़क हाथों से उखड़ी, ग्रामीणों में रोष
- 87.87 लाख की सड़क में घोर लापरवाही
- एमपीआरडीसी की नाक के नीचे ठेकेदार ने खेतों की तर्ज पर डाल दीं पुलिया
मंडला महावीर न्यूज 29. केंद्र व राज्य सरकार आदिवासियों और सुदूर ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए भले ही करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन विभागीय अफसरों की सुस्ती और ठेकेदारों की मनमानी के कारण ये योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। ताजा मामला बीजाडांडी जनपद के अंतर्गत जमुनिया पंचायत के पोषक ग्राम डोभी में सामने आया है। यहाँ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जनमन योजना के तहत बनी एक नई सड़क निर्माण के महज 20 दिनों के भीतर ही जगह-जगह से उखडऩे लगी है। घटिया निर्माण कार्य को देखकर ग्रामीणों में प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
जानकारी अनुसार नेशनल हाइवे 30 से डोभी बैगा मोहल्ला तक लगभग 1.52 किलोमीटर की इस सड़क का निर्माण मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण परियोजना इकाई मंडला के तत्वावधान में कराया गया है। इस कार्य की स्वीकृत राशि 87.87 लाख रुपये थी। विभाग द्वारा इस सड़क निर्माण का जिम्मा मेसर्स वर्धमान ग्लोबल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड मंडला को सौंपा गया था। अनुबंध के तहत ठेकेदार को यह काम 31 अक्टूबर 2025 से शुरू कर 30 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण करना था।
हाथों से उखड़ रहा डामर, भारी वाहनों के आते ही धंसने का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य ठेकेदार कंपनी ने खुद काम न कराकर इसे पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर किसी अन्य पेटी ठेकेदार को सौंप दिया। समय सीमा से करीब चार महीने पहले ही आनन-फानन में सड़क का निर्माण तो पूरा कर लिया गया, लेकिन गुणवत्ता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से इस मार्ग पर पक्की सड़क निर्माण की मांग कर रहे थे। सालों के लंबे इंतजार के बाद जब सड़क बनी, तो उसकी हालत देखकर हर कोई दंग है। सड़क को बने अभी महीने भर भी नहीं बीता है और डामर की परतें हाथों से उखडऩे लगी हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में न तो सही मात्रा में मटेरियल का उपयोग किया गया है और न ही मानकों का ध्यान रखा गया है। बेहद निम्न दर्जे के डामर का इस्तेमाल किया गया है। स्थिति यह है कि यदि इस मार्ग से एक भी ओवर लोडेड वाहन गुजर जाए, तो पूरी सड़क मलबे में तब्दील होकर धंस जाएगी।
खेतों की तर्ज पर डाल दीं पुलिया, पुराने टूटे पाइपों का हुआ इस्तेमाल
ठेकेदार की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण सड़क पर बनाई गई पुलियाओं में देखने को मिला है। इस 1.52 किलोमीटर के टुकड़े में एक बड़ी पुलिया के साथ 4 से 5 जगहों पर कल्वर्ट (पाइप पुलिया) डाले गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पूरी सड़क बनने के बाद ठेकेदार ने इसे दोबारा खोदकर पाइप डाले और ऊपर से केवल मिट्टी डाल दी। इस निर्माण में न तो कोई कांक्रीट बेस तैयार किया गया और न ही विंग वॉल बनाई गई। ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह किसान अपने खेतों की मेढ़ को जोडऩे के लिए अस्थाई पाइप डालते हैं, ठीक उसी तर्ज पर यहाँ भी पाइप डाल दिए गए हैं। इतना ही नहीं इस काम में किसी अन्य जगह से निकले हुए पुराने और टूटे-फूटे पाइपों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया है। ग्रामीणों को डर है कि आगामी पहली ही मूसलाधार बारिश में यह पूरी सड़क और पुलिया ताश के पत्तों की तरह बह जाएगी।
अफसरों की मॉनिटरिंग शून्य, मिलीभगत की आशंका
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और ठेकेदार की आपसी मिलीभगत के कारण ही इतना बड़ा घपला हुआ है। काम के दौरान विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या सब-इंजीनियर मौके पर मॉनिटरिंग के लिए नहीं पहुंचा, जिससे ठेकेदार को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई।
विभाग का पक्ष
इस गंभीर लापरवाही को लेकर जब संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी दबी जुबान में माना कि पुलिया और पाइप लगाने के कार्य में लापरवाही बरती गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी सड़क का कुछ काम बाकी है और ठेकेदार को बुलाकर इसे दोबारा सही कराया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग अब दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई करता है या लीपापोती कर जनता के पैसों की बर्बादी पर पर्दा डाल दिया जाता है।










