5 लाख पेड़ों की बलि और 31 गांवों के विस्थापन पर बवाल

बसनिया बांध परियोजना

5 लाख पेड़ों की बलि और 31 गांवों के विस्थापन पर बवाल

  • पर्यावरणीय रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
  • नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से तीखे सवाल
  • बसनिया बांध के पर्यावरणीय प्रभाव और जनसुनवाई को लेकर उठे कदम

मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा घाटी में प्रस्तावित बसनिया ओढारी बांध परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं की आवाजें तेज होने लगी हैं। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के वरिष्ठ सदस्य राज कुमार सिन्हा ने मांग की है कि इस परियोजना की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाए, जिससे प्रभावित नागरिक इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को समझ सकें।बताया गया कि प्रस्तावित बसनिया बांध के कारण मंडला और डिंडोरी जिलों के 31 गांवों के कुल 2,737 परिवार सीधे तौर पर विस्थापित और प्रभावित होने जा रहे हैं। इस परियोजना के चलते कुल 6343 हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाएगी। डूब क्षेत्र में निजी भूमि 2,443 हेक्टेयर, वन भूमि 2,107 हेक्टेयर, शासकीय भूमि 1,793 हेक्टेयर, कुल डूब क्षेत्र 6,343 हेक्टेयर भूमि आएगी। इस विशाल वन भूमि के डूबने के कारण क्षेत्र में लगभग 5 लाख पेड़ों की कटाई होने का अनुमान है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

कम उत्पादन और विशेषज्ञ समिति के कड़े निर्देश 

इस परियोजना से 8,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और 100 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार 100 मेगावाट की क्षमता होने के बावजूद इससे सालाना केवल 35 करोड़ यूनिट बिजली का ही उत्पादन हो सकेगा। इसी के मद्देनजर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की नदी घाटी विशेषज्ञ समिति ने 21 नवंबर 2023 को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को एक विस्तृत लिखित निर्देश जारी किया था। समिति ने निर्देश दिया था कि परियोजना को हरी झंडी मिलने से पहले कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का वैज्ञानिक व जमीनी अध्ययन किया जाए।
बताया गया कि इन महत्वपूर्ण बिन्दुओं में नर्मदा और संबंधित नालों के जलग्रहण क्षेत्र की वहन क्षमता, जल प्रवाह की निरंतरता और संचयी पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत अध्ययन। डूब क्षेत्र में आने वाले वृक्षों, वनस्पतियों और जीवों की संख्या व घनत्व की प्रजातिवार सूची तैयार करना और अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित वन्यजीवों के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से संरक्षण योजना स्वीकृत कराना। इसके साथ ही स्थानीय व प्रवासी पक्षियों और मछलियों की विविधता पर पडऩे वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन। जलाशय व वन क्षेत्र से लगे कम से कम 10 गांवों की मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन और तीनों ऋतुओं में 10 अलग-अलग स्थानों पर भूजल स्तर का मापन करना, डाउनस्ट्रीम और डूब क्षेत्र में रेत व अन्य खदानों का सर्वेक्षण, निर्माण सामग्री के परिवहन की विस्तृत रिपोर्ट तथा उपयोग में आने वाली खदानों के सुधार व पुर्नस्थापन की कार्ययोजना शामिल है।

जनसुनवाई की मांग 

पर्यावरण कार्यकर्ता राज कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 के नियमों के तहत, इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक औपचारिक जनसुनवाई आयोजित की जानी अनिवार्य है। इस जनसुनवाई के माध्यम से ही स्थानीय नागरिकों और प्रभावित परिवारों से उनके अधिकारों, सामाजिक प्रभावों और पर्यावरणीय चिंताओं से जुड़ी आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जा सकते हैं। इसलिए इस रिपोर्ट का सार्वजनिक होना बेहद जरूरी है।


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