बच्चों का पेट भरने वाली रसोइयों का पेट खाली

रसोइयों का छलका दर्द

बच्चों का पेट भरने वाली रसोइयों का पेट खाली, 5 साल से जून का मानदेय अटका

  • रसोइया उत्थान संघ का सरकार को अल्टीमेटम
  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक वेतन दो, वरना चूल्हा-चौका बंद

मंडला महावीर न्यूज 29. स्कूलों में नौनिहालों को गरम-गरम खाना परोसने वाली रसोइयों के अपने घर का चूल्हा आज खुद ठंडा पड़ा है। रसोइया उत्थान संघ समिति जिला मंडला के संस्थापक पीडी खैरवार के नेतृत्व में रसोइयों ने मुख्यमंत्री और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा है। इस 9 सूत्रीय मांग पत्र के जरिए वर्षों से लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की गुहार लगाई गई है। संघ ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पिछले 5 वर्षों से उन्हें जून महीने का मानदेय नहीं दिया जा रहा है, जबकि जून की तपती धूप में भी उनसे काम लिया जाता है।
मार्च-अप्रैल का वेतन भी गायब, उधारी में कट रही जिंदगी :
संघ के जिला अध्यक्ष कुंवर सिंह मरकाम ने बताया कि रसोइयों को मार्च और अप्रैल 2026 का मानदेय भी आज तक नसीब नहीं हुआ है। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा हम दूसरों के बच्चों को खाना खिलाएं या अपने बच्चों का पेट भरें, हमारी जिंदगी उधारी के भरोसे कट रही है।

बंधुआ मजदूरी नहीं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का मिले दर्जा 

रसोइयों ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि अब वे बंधुआ मजदूरी या चाकरी नहीं करेंगे। उनकी मुख्य मांग है कि रसोइयों को शासकीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देकर सम्मानजनक वेतन और सभी सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएं। इसके साथ ही आयु सीमा के अलावा किसी भी अन्य बहाने से रसोइयों को स्कूलों से बाहर न निकाला जाए। ज्ञापन में इस बात पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है कि रसोइयों से खाना बनाने के अलावा स्कूल में झाड़ू-पोछा लगाने और पानी भरने जैसे काम भी कराए जा रहे हैं, जो कि सर्वथा गलत है।

आजीविका मिशन और राशन व्यवस्था पर उठाए सवाल 

मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम का संचालन करने वाले समूहों ने आरोप लगाया कि उन पर जबरन आजीविका मिशन से जुड़कर कर्ज लेने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। इसके अलावा राशन और बजट का आवंटन दैनिक उपस्थिति के बजाय स्कूल की कुल दर्ज संख्या के आधार पर करने की मांग की गई है जिससे बच्चों की थाली खाली न रहे। विशेष अवसरों पर बनने वाले विशेष भोज के लिए भी अलग से बजट देने की मांग उठाई गई है।

चूल्हा-चौका बंद कर सड़कों पर उतरने की चेतावनी 

संगठन मंत्री झाम सिंह यादव ने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जिला स्तर की स्थानीय समस्याएं तुरंत नहीं सुलझाई गईं और शासन स्तर की मांगों का प्रस्ताव भोपाल नहीं भेजा गया, तो जिलेभर की रसोइयां स्कूलों का चूल्हा-चौका बंद कर उग्र आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगी। इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से कुंवर सिंह मरकाम, जयंती अहिरवार, सुरेश बघेल, कृष्णा धार्वैया, गंगोत्री विश्वकर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में रसोइयां और समूह सदस्य उपस्थित रहे।


Leave a Comment