बलिदान दिवस पर सुलगता सवाल
विधानसभा में संकल्प पारित होने के 6 महीने बाद भी क्यों नहीं बदला मंडला फोर्ट स्टेशन का नाम
- चुनावी मंचों तक ही सीमित है आदिवासी गौरव
- वीरांगना रानी दुर्गावती रेलवे स्टेशन की फाइल अटकने से गोंडवाना अंचल में आक्रोश
विशेष संवाददाता, मंडला 24 जून 2026
मंडला महावीर न्यूज 29. आज पूरा महाकौशल और गोंडवाना अंचल वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस मना रहा है। 24 जून 1564 को मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाली रानी दुर्गावती को आज कृतज्ञ राष्ट्र नमन कर रहा है। लेकिन इस गौरवमयी अवसर पर मंडला की जनता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से एक बड़ा और तीखा सवाल पूछ रही है—जब मध्य प्रदेश विधानसभा में मंडला रेलवे स्टेशन का नाम “वीरांगना रानी दुर्गावती रेलवे स्टेशन” करने संबंधी संकल्प सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, तो आज तक उस पर अमल क्यों नहीं हुआ?
विधानसभा में पारित हुआ था संकल्प, पर ज़मीन पर नतीजा शून्य
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 5 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा द्वारा एक अशासकीय संकल्प प्रस्तुत किया गया था। इस संकल्प में मंडला रेलवे स्टेशन का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने की पुरज़ोर मांग उठाई गई थी। विधानसभा की कार्यवाही के आधिकारिक वीडियो में भी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस संकल्प के पारित होने की घोषणा स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद महाकौशल की जनता को स्वाभाविक अपेक्षा थी कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को तुरंत केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय को भेजकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी। मगर छह महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो नाम परिवर्तन की कोई आधिकारिक घोषणा हुई है और न ही प्रशासन द्वारा जनता को यह बताया गया है कि इस प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है।
जनता का आरोप: केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया ‘आदिवासी गौरव’
क्षेत्रीय जनता और सामाजिक संगठनों का सीधा आरोप है कि आदिवासी गौरव और गोंडवाना साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास की बातें केवल चुनावी मंचों और भाषणों तक ही सीमित रहती हैं। जब धरातल पर सम्मान देने की बारी आती है, तो फाइलें कछुआ गति से रेंगने लगती हैं या फिर ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं।
इस ढुलमुल रवैये के कारण अब स्थानीय सांसद और क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं:
- क्या विधानसभा से संकल्प पारित होने के बाद क्षेत्रीय सांसद ने रेल मंत्रालय के समक्ष इस विषय को प्रमुखता से उठाया?
- क्या राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से केंद्र को यह प्रस्ताव भेजा है?
- यदि प्रस्ताव भेजा गया है, तो वह किस स्तर पर लंबित है और यदि नहीं भेजा गया, तो इसके पीछे क्या कारण हैं?
बढ़ रहा है असंतोष
जनभावनाओं से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अब आदिवासी समाज, विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम रेल यात्रियों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस वीरांगना ने गढ़ा-मंडला की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, उनके नाम पर जिले के मुख्य रेलवे स्टेशन का नामकरण होना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे इतिहास और सर्वोच्च बलिदान का सच्चा सम्मान है।
बलिदान दिवस के इस पावन अवसर पर मंडला की जनता अपने जनप्रतिनिधियों से दोटूक जवाब मांग रही है—“सम्मान के इस संकल्प का परिणाम मंडला को कब मिलेगा और कब हटेगा फाइलों का यह पहरा?”











