सीएम डॉ. मोहन ने की विज्ञान-प्रौद्योगिकी की समीक्षा, कहा- गुजरात की तर्ज पर एमपी में बनाएं गिफ्ट सिटी
- मध्यप्रदेश में आईटी सेक्टर में निवेश की अपार संभावनाएं
- मप्र में टेक सेक्टर में आया 12,500 करोड़ का निवेश
- इस सेक्टर से 50 हजार नए रोजगार सृजित
भोपाल/मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीएम हाउस में 18 जून को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्यों-अन्य गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी भविष्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। मध्यप्रदेश में इस क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। हमें नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर प्रदेश को ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सशक्त केंद्र बनाना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयास किए जाएं। निवेश परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि वे गुजरात की तर्ज पर मध्यप्रदेश (राजधानी क्षेत्र भोपाल) में भी गिफ्ट सिटी बनाने के लिए ठोस प्रयास करें। उन्होंने कहा कि उज्जैन में मेडी सिटी, साइंस सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज भी तैयार किया जा रही है। इसीलिए यहीं पर मेडिकल, साइंस और टेक्निकल एजुकेशन के एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की स्थापना की जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से भी समन्वय किया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए निवेश संवर्धन पर विशेष बल दिया। उन्होंने विभाग द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रमुख निवेश (लीड इन्वेस्टमेंट) आकर्षित करने के लिए तैयार की गई विशेष कार्ययोजना की समीक्षा की तथा इसे समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में होने वाला निवेश न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, अनुसंधान, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने तथा निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रगति रिपोर्ट तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में जरूरी मानव संसाधन की पदपूर्ति कर लें। मुख्यमंत्री ने बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को और भी सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए।
केंद्र को भेजा अहम प्रस्ताव
बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने बताया कि उज्जैन में डीपटेक रिसर्च पार्क की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। अब इसी प्रस्ताव के तहत उज्जैन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए नई कार्ययोजना तैयार कर संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह सेंटर करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। डीपटेक रिसर्च पार्क भी अब इसी सेंटर ऑॅफ एक्सीलेंस का हिस्सा होगा। उन्होंने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भोपाल में गिफ्ट सिटी बनाने की तैयारी है। इसे ईकाई सिटी (EKAI CITY – एजुकेशन, नॉलेज एण्ड एआई सिटी) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा करीब 10 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग की जाएगी। राज्य सरकार भी इसमें राशि लाएगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की चार यूनिवर्सिटीस मध्यप्रदेश में अपना अध्ययन परिसर (स्टडी कैम्पस) खोलना चाहती हैं। उनसे भी समन्वय किया जा रहा है।
उभरता टेक हब बन रहा एमपी
प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग एम. सेलवेंद्रम ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का एक उभरता हुआ टेक हब बन रहा है। यहां 5 आईटी एसईजेड, 15 से अधिक आईटी पार्क, 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियां, करीब 1200 से अधिक टेक स्टार्टअप्स कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले 300 से अधिक कॉलेज, 50 हजार से अधिक तकनीकी स्रातक-वर्ष (यूजी. पीजी, डिप्लोमा), आईआईटी, आईआईआईटीडीएम, आईआईएम, एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भी हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तकनीकी क्षेत्र की 6 नीतियां हैं। एमपी स्टार्ट अप पॉलिसी 2022 भी लागू है। सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय, ब्याज सब्सिड़ी जैसे प्रोत्साहन भी निवेशकों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में टेक सेक्टर में लगभग 12 हजार 500 करोड़ रुपए का निवेश आया है। इससे करीब 50 हजार नए रोजगार का सृजन हुआ है। विभाग द्वारा आईटी आईटीईएस तथा क्वांटम और एआई जैसी उभरते तकनीकी सेक्टर, डेटा सेंटर, ईएसडीएम- डेटा सेंटर कम्पोनेंट्स मैनूफेक्चरिंग, सेमी कंडक्टर- पैकेजिंग, डिजाइन, फैबलेस तकनीक, ड्रोन निर्माण, जीसीसी, एवीजीसी- एक्सआर एवं स्पेस टेक पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में इस पूरे सेक्टर के अंतर्गत करीब 5 हजार 892 करोड़ रूपए की मेगा परियोजनाओं के प्रस्ताव पाइपलाइन में है।
सीएम डॉ. यादव ने दिए अहम निर्देश, टाइगर स्ट्राइक फोर्स जैसी बनेगी टास्क फोर्स
- मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा
- आंध्रप्रदेश को देंगे बाघ और गौर, बदले में उनसे लेंगे वाइल्ड डाग्स
- राजस्थान से सोन चिड़िया प्राप्त कर घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ेंगे
भोपाल/मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग के कार्यों और गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और समृद्ध वन क्षेत्रों से है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी और दीर्घकालिक पहल सुनिश्चित की जानी चाहिए। जैविक एवं वानस्पतिक विविधताओं का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, यह हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी और संकल्प है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों के विस्तार, पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की उनके रीति-रिवाजों के साथ सहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि वन विभाग वन्य पर्यटन का तेजी से विस्तार करे। इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। वन पर्यटन बढ़ाने के लिए पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं। उन्हें होम स्टे जैसे आकर्षणों के बारे में भी बताया जाए। सफारी गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाए। इससे पर्यटक तेजी से जुड़ेंगे।
सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश की समृद्ध वन सम्पदा के संरक्षण, संवर्धन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था अपनाई जाए। साथ ही नए वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर प्रदेश की वन सम्पदा को और भी समृद्ध बनाया जाए। जंगल की सीमा के अंदर जनजातीय बंधुओं के देवस्थानों को समुचित तरीके से उनके रीति-रिवाजों के अनुसार ही विकसित करें। बताया गया कि इस साल 300 देवस्थान विकसित किए जाएंगे। इससे पहले 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं।
कंट्रोल रूम की स्थापना का अनुमोदन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आंध्रप्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर देने का अनुरोध मिला है। उन्हें बाघ और गौर देने के लिए कार्यवाही की जाए। इसके बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डाग्स या अन्य वन्य प्राणी लेने के प्रयास किए जाएं। इसी प्रकार राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिड़िया देने पर सहमति व्यक्त की गई है। उनसे सोन चिड़िया प्राप्त कर ली जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर वनों के संगठित अपराधों के सख्ती से नियंत्रण के लिए ‘राज्य स्तरीय टास्क फोर्स’ का गठन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसी प्रकार वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वन मुख्यालय स्तर पर ‘कमाण्ड एवं कन्ट्रोल रूम’ की स्थापना के प्रस्ताव को भी अनुमोदन दिया। उन्होंने खनिज के परिवहन के लिए वन विभाग को ‘परिवहन अनुज्ञा शुल्क’ में वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दी। उन्होंने कहा कि मानव और वन्य जीव द्वन्द को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि ऐसे द्वन्द में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल मिलकर ऐसी आपदा का समुचित प्रबंधन कर सकेंगे।
बढ़ाई जाएगी सहायक महावतों की संख्या
बैठक में प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि राजस्थान से सोन चिड़िया प्राप्त कर उन्हें मुख्यमंत्री के हाथों से घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 52 चीतें मौजूद हैं, इनमें से 32 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्में हैं। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण में नर-मादा (दो) चीते जुलाई 2026 में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या और इनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश में पांच स्थानों यथा कान्हा, बांधवगढ़, पेंच एवं पन्ना नेशनल पार्क के समीप वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए वन विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल गई है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की सीमा में मौजूद 6 हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश में हाथियों के अनुरक्षण के लिए सहायक महावत के पद बढ़ाए जाएंगे। वन राजस्व भूमि सीमा विवाद के निराकरण के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अनूपपुर एवं डिण्डौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर आपदा देखने को मिली है। यह बीमारी 30 साल में एक बार देखने मे आती है। पिछली बार 1997 में यह बीमारी आई थी। इस आपदा के विमोचन के लिए अतिरिक्त बजट से बीमारीग्रस्त वृक्षों का विदोहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है। तेंदुपत्ता संग्राहकों को इस साल कुल 710.71 करोड़ रुपए की तेंदूपत्ता बोनस राशि वितरित की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने के लिए कार्यवाही की जा रही है।











