मिलेट क्वीन लहरी बाई ने मंडला के श्री अन्न को दिलाई वैश्विक पहचान
इंदौर ब्रिक्स एग्रीकल्चर समिट में बटोरीं सुर्खियां
- 21 देशों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक बीजों के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को सराहा
- जिले की महिलाओं और किसानों के लिए बनीं प्रेरणा
मंडला महावीर न्यूज 29. अपनी कड़ी मेहनत, नवाचार और पारंपरिक कृषि ज्ञान के बल पर मंडला जिले की प्रगतिशील कृषक श्रीमती लहरी बाई आज देश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी भारत का नाम रोशन कर रही हैं। मिलेट क्वीन के नाम से विश्व विख्यात लहरी बाई ने श्री अन्न (मोटे अनाजों) के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में जो उल्लेखनीय योगदान दिया है, उसने उन्हें आज समूचे कृषि जगत और विशेषकर आदिवासी अंचल के किसानों के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत बना दिया है।
वर्षों पहले लिया था कोदो-कुटकी और रागी के देशी बीजों को बचाने का संकल्प
श्रीमती लहरी बाई ने वर्षों पहले कोदो, कुटकी, रागी और सांवा जैसे अन्य मोटे अनाजों की लुप्त होती पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करने का संकल्प लिया था। उन्होंने अपने खेतों में विभिन्न प्रकार के दुर्लभ देशी बीजों का एक अनूठा संग्रह (सीड बैंक) तैयार किया। इस प्रयास से उन्होंने न केवल कृषि क्षेत्र की जैव विविधता को बचाया, बल्कि स्थानीय किसानों को भी श्री अन्न की खेती के प्रति दोबारा जागरूक किया। उनके इस सराहनीय प्रयास के चलते आज क्षेत्र के सैकड़ों किसान कम लागत और उच्च पोषण मूल्य वाले मिलेट उत्पादन की ओर तेजी से आकर्षित हुए हैं।
इंदौर ब्रिक्स समिट 2026 में विदेशी प्रतिनिधियों ने माना लोहा
हाल ही में इंदौर में आयोजित हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ब्रिक्स एग्रीकल्चर समिट 2026 में लहरी बाई ने मंडला जिले का प्रतिनिधित्व किया। समिट में उनके द्वारा लगाए गए मंडला मिलेट स्टॉल ने देश-विदेश से आए कृषि वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। लहरी बाई ने स्टॉल पर विभिन्न मिलेट उत्पादों और बीजों का प्रदर्शन करते हुए उनके पोषण, स्वास्थ्य लाभ व आर्थिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। इस दौरान समिट में हिस्सा लेने आए लगभग 21 देशों के विदेशी प्रतिनिधियों ने उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की और मंडला में मिलेट संवर्धन के मॉडल को पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय बताया।
महिला सशक्तिकरण और समृद्धि का नया आधार बना श्री अन्न
श्रीमती लहरी बाई का दृढ़ विश्वास है कि श्री अन्न केवल एक फसल नहीं है, बल्कि यह सीमांत किसानों की समृद्धि और आम जनता के बेहतर स्वास्थ्य का मुख्य आधार है। आज उनके ही कुशल मार्गदर्शन में मंडला जिले के कई महिला स्व-सहायता समूह और ग्रामीण किसान मिलेट आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इन स्थानीय उत्पादों की बाजार में बढ़ती मांग के कारण ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।









