12 लाख के बजट पर ठेकेदार ने फेरा घटिया सामग्री का पानी

नैनपुर की खिरखिरी पंचायत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा घाट निर्माण

12 लाख के बजट पर ठेकेदार ने फेरा घटिया सामग्री का पानी

  • इस्टीमेट ताक पर रखकर हो रहा काम, हाथ लगाने से उखड़ रहा प्लास्टर
  • ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से की जांच की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. शासन की जनहितैषी योजनाओं और जनता के टैक्स के पैसों की धज्जियां किस कदर उड़ाई जाती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण जनपद पंचायत नैनपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खिरखिरी में सामने आया है। यहाँ ग्रामीणों की सुविधा और जल स्रोतों के संरक्षण के उद्देश्य से स्वीकृत किया गया घाट निर्माण कार्य पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। ठेकेदार द्वारा सरेआम नियमों को ताक पर रखकर अत्यंत घटिया स्तर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।जानकारी अनुसार ग्रामीणों को पानी की सहूलियत देने और जल स्रोतों को साफ-सुथरा रखने के लिए शासन द्वारा यहाँ 12 लाख की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इस बड़े बजट से एक मजबूत और व्यवस्थित घाट का निर्माण होना था, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री का स्तर इतना निम्न है कि घाट पूरा होने से पहले ही ढहने की कगार पर पहुंच गया है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, पक्षपात और लापरवाही के आरोप 

इस घटिया निर्माण को देखकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह हमारे गाँव के साथ सीधा धोखा है। सरकारी इस्टीमेट को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सीमेंट और रेत का अनुपात इतना खराब है कि हाथ लगाने से ही प्लास्टर उखड़ रहा है। यदि समय रहते इसकी उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह घाट पहली बारिश की बौछार भी नहीं झेल पाएगा।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल 

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों की कार्यप्रणाली है। शासकीय नियमों के विरुद्ध सरेआम हो रहे इस निर्माण को लेकर अब तक किसी भी उप-यंत्री या जनपद के आला अधिकारियों ने मौके का मुआयना करना मुनासिब नहीं समझा है। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी अब सीधे तौर पर उनके संरक्षण की ओर इशारा कर रही है। जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके शह पर ठेकेदार इतना बेखौफ होकर सरकारी पैसों की बर्बादी कर रहा है।

कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग 

विकास के दावों के बीच धरातल पर दिख रही इस खोखली हकीकत को लेकर खिरखिरी के ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर से मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच नहीं होती और दोषी ठेकेदार व लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।


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