मानसून की बेरुखी से किसान चिंतित, सूखे पड़े खेत
खाद किल्लत और फार्मर आईडी ने बढ़ाईं मुश्किलें
- केरल में मानसून की देरी से मंडला के अन्नदाता परेशान
- साधन विहीन किसानों को पानी खरीदने की सता रही चिंता
मंडला महावीर न्यूज 29. देश और प्रदेश में भले ही आधुनिकता के तमाम दावे किए जा रहे हों, लेकिन आज भी कृषि क्षेत्र पूरी तरह से प्रकृति की अनुकूलता पर निर्भर है। इस वर्ष मंडला जिले के किसान मौसम के बदले मिजाज और मानसून की बेरुखी को लेकर गहरे संकट और चिंता में डूबे हुए हैं। जून का महीना शुरू होने के बावजूद क्षेत्र में बारिश के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस बेरुखी का सबसे बड़ा असर उन गरीब और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, जिनके पास सिंचाई के निजी साधन उपलब्ध नहीं हैं। वे पूरी तरह प्रकृति के भरोसे आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
जानकारी अनुसार इस वर्ष मंडला जिले में भीषण गर्मी का प्रकोप रहा, जिसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। अत्यधिक तापमान के कारण जमीन की पूरी नमी खत्म हो चुकी है और खेत सूखे पड़े हैं। स्थिति यह है कि कड़क धूप के कारण खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। समय पर बारिश न होने के कारण किसान अपने खेतों में जुताई और रोटावेटर चलाने जैसे प्राथमिक कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। खरीफ फसल की शुरुआत के लिए जो परहा तैयार करने का समय होता है, पानी के अभाव में किसान उसकी तैयारी तक शुरू नहीं कर पाए हैं।
सिंचाई साधनों के अभाव में पानी खरीदने की मजबूरी
जिले में कृषि की स्थिति दो वर्गों में बंटती नजर आ रही है। एक तरफ वे संपन्न किसान हैं जिनके पास कुएं, ट्यूबवेल या अन्य सिंचाई के साधन मौजूद हैं। ऐसे किसानों ने अपने खेतों का सुधार कार्य और जुताई का काम शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ साधन विहीन किसान केवल बादलों का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं बरसा, तो उन्हें अपनी फसलों को बचाने और बोनी के लिए महंगे दामों पर पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत दोगुनी हो जाएगी।
केरल में मानसून की देरी से मंडला में बढ़ी बेचैनी
मौसम और मानसून के चक्र को लेकर स्थानीय किसानों का कहना है कि अब तक केरल में भी मानसून ने ठीक से दस्तक नहीं दी है। कृषि जानकारों और किसानों के अनुभव के अनुसार जब तक केरल में मानसून सक्रिय नहीं होता, तब तक मंडला जिले में बारिश की उम्मीद करना बेमानी है। आमतौर पर केरल में मानसून आने के करीब 10 से 12 दिन बाद मंडला जिले में मानसूनी हवाएं सक्रिय होती हैं। इस बार केरल में ही देरी होने के कारण मंडला में मानसून काफी पिछड़ गया है। किसानों को डर है कि इस बार फिर खरीफ की फसल लेट हो जाएगी, जिसका सीधा असर पैदावार और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
खाद की किल्लत और फार्मर आईडी ने बढ़ाई दोहरी मार
एक तरफ जहां प्रकृति अन्नदाताओं की परीक्षा ले रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और व्यवस्थागत कमियों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आगामी खरीफ सीजन के लिए समितियों और बाजारों में किसानों को खाद मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खाद के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। इसके साथ ही शासकीय योजनाओं और फसलों के सुचारू प्रबंधन के लिए अनिवार्य की गई फार्मर आईडी बनवाने में भी भारी परेशानी आ रही है। किसानों का कहना है कि वे खेतों की चिंता करें या दफ्तरों के चक्कर काटें। यदि समय रहते प्रशासन ने खाद की उपलब्धता और फार्मर आईडी की समस्या का समाधान नहीं किया, तो किसानों का आक्रोश फूट सकता है।









