अंर्तराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस
मंडला जिले में मिशन वात्सल्य से संवर रहा बचपन
- 545 बच्चे पा रहे हैं गैर-संस्थागत देखरेख का लाभ
- बाल संरक्षण के लिए मंडला प्रशासन की पहल
- 70 पॉक्सो पीडि़तों को मिले सपोर्ट पर्सन
- स्पॉन्सरशिप से जुड़ीं कई कल्याणकारी योजनाएं
मंडला महावीर न्यूज 29. 1 जून को संपूर्ण विश्व में अंर्तराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना, बाल शोषण को रोकना और उन्हें हिंसा व उपेक्षा से बचाकर एक सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। इसी कड़ी में मंडला जिला प्रशासन बच्चों के सुरक्षित भविष्य, उनके सर्वांगीण विकास और संरक्षण के लिए मिशन वात्सल्य एवं अन्य शासकीय योजनाओं के माध्यम से लगातार प्रभावी कदम उठा रहा है।
बाल कल्याण समिति जिला मंडला के अध्यक्ष गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि पुलिस द्वारा समिति के समक्ष पॉक्सो एक्ट के कुल 70 प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं। बाल कल्याण समिति ने संवेदनशीलता बरतते हुए इन सभी 70 पॉक्सो प्रकरणों में पीडि़त बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षित सपोर्ट पर्सन उपलब्ध कराया है, ताकि उन्हें उचित विधिक व मानसिक संबल मिल सके। बताया गया कि मंडला कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे के कुशल मार्गदर्शन, महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ शालिनी तिवारी और सहायक संचालक रोहित बड़कुल के पर्यवेक्षण में बाल कल्याण समिति द्वारा जिले में बच्चों के संस्थागत और गैर-संस्थागत पुनर्वास के लिए शानदार कार्य किया जा रहा है।
योजना के तहत बच्चों की हो रही देखरेख
बताया गया कि वर्तमान में जिले के विभिन्न शासकीय और गैर-शासकीय योजनाओं के अंतर्गत बच्चों को लाभ मिल रहा है। जिसमें स्पॉन्सरशिप योजना के तहत गैर-संस्थागत देखरेख के अंतर्गत सबसे अधिक 516 बच्चों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत जिले के 4 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना से 9 बच्चों को जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री कोविड-19 योजना के अंतर्गत 15 बच्चों को सहायता मिल रही है। फॉस्टर केयर योजना के तहत 1 बच्चे की देखरेख की जा रही है। संस्थागत देखरेख के तहत मंडला में बालकों के लिए 50 बच्चों की क्षमता वाला बाल गृह संचालित है, जहाँ वर्तमान में देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले 11 बच्चे निवासरत हैं।
विभिन्न योजनाओं के तहत मिल रही वित्तीय सहायता
प्रशासन द्वारा बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए विभिन्न योजनाओं में सीधे बैंक खातों में राशि प्रदान की जा रही है। स्पॉन्सरशिप व मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत चार हजार रूपए प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। बाल आशीर्वाद योजना में 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद हितग्राही को 5,500 प्रति माह की स्टाईपैंड राशि का भी प्रावधान है। मुख्यमंत्री कोविड-19 योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राही को 5,000 प्रति माह की राशि प्रदान की जाती है। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना में बच्चों को मुफ्त आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड के साथ-साथ 23 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर ?10 लाख की एकमुश्त सहायता राशि देने का प्रावधान है।
अंर्तराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का गौरवशाली इतिहास
इस दिवस की शुरुआत पहली बार वर्ष 1925 में जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में आयोजित बाल कल्याण के लिए विश्व सम्मेलन के दौरान हुई थी। बाद में वर्ष 1949 से इसे औपचारिक रूप से हर साल 1 जून को मनाने की परंपरा शुरू हुई। यह दिवस 20 नवंबर को मनाए जाने वाले संयुक्त राष्ट्र के सार्वभौमिक बाल दिवस, भारत में 14 नवंबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय बाल दिवस और 26 दिसंबर को मनाए जाने वाले वीर बाल दिवस से पूरी तरह भिन्न है। इस दिन दुनिया भर में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन और उचित चिकित्सा का अधिकार दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं।









