सरपंच-उपसरपंच ने खोली पोल, अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से हो रहा घटिया कार्य
बबलिया में तहसील भवन निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप
- टुकड़े-टुकड़े में खड़े किए जा रहे तहसील भवन के पिलर
- तराई के नाम पर सिर्फ दिखावा
- जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से की जांच की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. बबलिया में स्वीकृत नवीन तहसील भवन का निर्माण कार्य शुरुआत से ही विवादों और भ्रष्टाचार के घेरे में आ गया है। विगत वित्तीय वर्ष 2023-24 से स्वीकृत इस महत्वपूर्ण भवन का निर्माण ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण बेहद कछुआ गति से चल रहा है। इसके साथ ही निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर घोर लापरवाही और गुणवत्ताविहीन कार्य किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
बताया गया कि ग्राम पंचायत देवरी कला के सरपंच चरण सिंह पंद्राम एवं उपसरपंच संजय सोनी ने निर्माण स्थल का जायजा लेने के बाद सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर से लेकर जो कॉलम, पिलर खड़े किए गए हैं, उनमें भारी तकनीकी कमियां हैं। खड़े किए गए कॉलम एक लाइन में नहीं हैं। यदि मौके पर निष्पक्ष जांच की जाए, तो सभी कॉलम आड़े-तिरछे पाए जाएंगे। कंक्रीट मिक्सिंग के दौरान वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिससे पिलर अंदर से खोखले रह सकते हैं। बताया गया कि कॉलम की ढलाई एक बार में करने के बजाय टुकड़ों-टुकड़ों में सेंट्रिंग लगाकर की गई है। इसके कारण गिट्टी, रेत और सीमेंट के अलग-अलग जोड़ बन गए हैं और पिलरों में साफ तौर पर दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे भविष्य में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
भीषण गर्मी में तराई गायब, सीमेंट से की जा रही लीपापोती
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिलरों में आई दरारों और तकनीकी खामियों को छुपाने के लिए ऊपर से सीमेंट की लीपापोती कर दी जाती है। इस भीषण गर्मी के मौसम में कंक्रीट के पिलर खड़े तो कर दिए गए हैं, लेकिन नियमों के अनुसार उनकी बिल्कुल भी तराई नहीं की जा रही है। निर्माण स्थल पर मात्र 27 बोरे लपेटकर सिंचाई के नाम पर केवल खानापूर्ति और दिखावा किया जा रहा है।
किसानों को हो रही भारी परेशानी, आक्रोशित हैं ग्रामीण
तहसील भवन का निर्माण समय सीमा के भीतर पूरा न होने के कारण क्षेत्र के किसानों और आम जनता को भारी प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार इस घटिया निर्माण कार्य को लेकर मौके पर आक्रोश भी प्रकट किया, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार की साठगांठ के चलते निर्माण कार्य में कोई सुधार नहीं किया गया, जिससे अब पूरे शासकीय प्रोजेक्ट पर ही सवालिया निशान लग गया है।
कलेक्ट्रेट से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं मंडला कलेक्टर से मांग की है कि वे स्वयं इस घटिया निर्माण कार्य का संज्ञान लें। मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी टीम से मौके की जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए, जिससे शासकीय धन का दुरुपयोग रुके और किसानों के हित में भवन का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय पर पूरा हो सके।









