कोर्ट के निर्णय के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ेंगे-प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर

इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

  • ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने जताया विरोध
  • प्रांताध्यक्ष बोले कोर्ट के निर्णय के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ेंगे
  • सुप्रीम कोर्ट में लगाएंगे क्यूरेटिव याचिका

मंडला महावीर न्यूज 29. अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समीक्षा याचिकाओं पर सुनाए गए फैसले को लेकर ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य रखा है। हालांकि, कोर्ट ने राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा को 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी है, जिसकी नई अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 तय की गई है।एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने बयान जारी कर कहा कि संगठन इस आदेश की गंभीर समीक्षा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सालों से कार्यरत पुराने शिक्षकों पर टीईटी थोपना उनके सेवा अधिकारों के साथ सरासर अन्याय है और वे इस फैसले को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते हैं।

श्री सिंगौर ने चेतावनी दी कि अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा इस निर्णय के विरुद्ध विधायिका (संसद) द्वारा आरटीई एक्ट में संशोधन कराने हेतु सड़क से लेकर संसद तक हर संभव संघर्ष करेगा। इसके साथ ही इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर करने सहित सभी आवश्यक न्यायिक उपाय अपनाए जाएंगे, ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा के साथ शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक बनाया जा सके।


 

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