5.51 लाख की लागत से बनी दीवार में पड़ी दरारें

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी बड़ी माई मंदिर की बाउंड्री वॉल

ढहने की कगार पर खड़ा निर्माण

  • 5.51 लाख की लागत से बनी दीवार में पड़ी दरारें
  • श्रद्धालुओं की जान पर मंडराया बड़ा खतरा

मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत नारायणगंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरी में शासन की राशि के दुरुपयोग और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। बताया गया कि नारायणगंज क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बड़ी माई मंदिर परिसर में 5वें और 15वें वित्त आयोग की करीब 5.51 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि से मंदिर परिसर की बनाई गई बाउंड्री वॉल निर्माण के कुछ ही समय बाद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रही है। गुणवत्ता के नाम पर किए गए इस खिलवाड़ ने न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया है, बल्कि मंदिर आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए इसे काल का ग्रास बना दिया है।जानकारी अनुसार मंदिर परिसर की सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर 18 वाई 2 मीटर की बाउंड्री वॉल का निर्माण किया गया था। निर्माण कार्य को पूरा हुए अभी अधिक समय नहीं बीता है, लेकिन दीवार में जगह-जगह चौड़ी और गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। निर्माण की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दीवार का एक बड़ा हिस्सा कभी भी जमींदोज हो सकता है। यह दीवार न केवल टेढ़ी हो चुकी है, बल्कि यह अब अपने ही वजन को संभालने में अक्षम प्रतीत हो रही है।

जुगाड़ के भरोसे सुरक्षा, प्रशासन बेखबर 

घटिया निर्माण की पोल खुलने के बाद जब दीवार गिरने की स्थिति में आ गई, तो ठेकेदार और पंचायत ने इसे गिरने से रोकने के लिए सीमेंट के खंभों का जुगाड़ू सहारा खड़ा कर दिया। यह सीमेंट के खंभे स्वयं इस बात का प्रमाण हैं कि निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। यह जुगाड़ू सहारा न केवल निर्माण की कमजोर नींव को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि संबंधित विभाग को जनता की सुरक्षा से अधिक खानापूर्ति करने की जल्दी थी।

आगामी मानसून में हादसे का अंदेशा 

बड़ी माई मंदिर में दर्शन के लिए प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगले ही माह मानसून का सीजन शुरू होने वाला है। मंदिर परिसर के पास बारिश का पानी जमा हो जाता है, जिससे जमीन में नमी बढ़ेगी और नींव और अधिक कमजोर होगी। ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि यदि पहली बारिश के पहले इस असुरक्षित ढांचे को ठीक नहीं किया गया, तो दीवार का गिरना तय है। बारिश के दौरान जलभराव के बीच यह ढहती हुई दीवार किसी भी समय बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।

मासूमों और बुजुर्गों की जान पर खतरा

मंदिर में आने वाले भक्तों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में होते हैं। क्षतिग्रस्त दीवार के पास से गुजरना अब मौत को दावत देने जैसा है। यदि किसी समय दीवार ढहती है, तो वहाँ मौजूद किसी भी श्रद्धालु का बचना मुश्किल होगा। बावजूद इसके संबंधित ग्राम पंचायत और जनपद प्रशासन इस गंभीर खतरे पर चुप्पी साधे बैठा है। स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समिति के सदस्यों ने इस मामले में कड़ा रोष प्रकट किया है।

ग्रामीणों ने की जांच की मांग 

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, सचिव और संबंधित उपयंत्री की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी धांधली संभव नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार सरपंच, सचिव और संबंधित उपयंत्री के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी बड़ी अनहोनी को टालने के लिए इस असुरक्षित ढांचे को अविलंब हटाकर पुन: मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाए। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।


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