गिद्ध गणना के अंतिम दिन मिले 263 गिद्ध

कान्हा टाइगर रिजर्व में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना संपन्न

गिद्ध गणना के अंतिम दिन मिले 263 गिद्ध

  • तीन दिवसीय अभियान में भारतीय और सफेद पीठ वाले गिद्धों की हुई पहचान
  • गणना में 21 अवयस्क गिद्ध भी आए नजर

मंडला महावीर न्यूज 29. पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में नेचुरल क्लीनर की भूमिका निभाने वाले गिद्धों की बढ़ती संख्या कान्हा के समृद्ध वातावरण के लिए एक अच्छी खबर है। बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग द्वारा प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना-2026 के दूसरे चरण ग्रीष्मकालीन गणना का कार्य कान्हा टाइगर रिजर्व में सपन्न हो गया है। गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता और उनके संरक्षण के उद्देश्य से कान्हा के कोर एवं बफर वनमंडल के साथ फेन वाइल्डलाइफ सेंचुरी के सभी 13 परिक्षेत्रों में तीन दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया। ग्रीष्मकालीन गणना के पहले दिन 306, दूसरे दिन 333 गिद्ध और तीसरे अंतिम दिन 263 गिद्ध मिले है।जानकारी अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना रविवार को संपन्न हो गया। गणना के तीसरे और अंतिम दिन कान्हा, मुक्की, सरही एवं किसली परिक्षेत्रों में 263 गिद्ध दर्ज किए गए। प्रशिक्षित अमले द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत की गई इस गणना में गिद्धों की दो प्रमुख प्रजाति के भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध मिले। यह विशेष गणना अभियान कान्हा टाइगर रिजर्व के चार प्रमुख परिक्षेत्र में प्रशिक्षित अमले और वन्यजीव विशेषज्ञों के दल ने दूरबीन और आधुनिक कैमरों की मदद से गिद्धों के ठिकानों पर नजर रखी।

दो दुर्लभ प्रजातियों की हुई पुष्टि, दिखे 21 शावक 

प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गणना के दौरान मुख्य रूप से गिद्धों की दो महत्वपूर्ण प्रजातियां मिली है। जिसमें भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध मिले है। विशेषज्ञों के दल ने आयु के आधार पर भी इनका वर्गीकरण किया है, जिसमें कुल 263 गिद्धों में से 242 वयस्क और 21 अवयस्क यानी गिद्धों के बच्चे शामिल हैं। अवयस्क गिद्धों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि कान्हा का वातावरण इनके प्रजनन और वंश वृद्धि के लिए पूरी तरह अनुकूल है।

संरक्षण रणनीतियों को मिलेगा बल 

बताया गया कि यह ग्रीष्मकालीन गणना 22 मई से 24 मई तक तीन दिनों तक चली। पार्क अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की समयबद्ध गणनाएं गिद्धों की प्रजातिगत स्थिति, उनकी संख्या के उतार-चढ़ाव और उनके आवासीय व्यवहार को समझने में मील का पत्थर साबित होती हैं। इस गणना से प्राप्त प्रामाणिक आंकड़े भविष्य में गिद्धों के संरक्षण की रणनीतियों को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


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