मंडला की दो ग्राम समितियों को मिला राज्य स्तरीय जैव विविधता पुरस्कार
श्मशान घाट क्षेत्र को बना दिया घना जंगल
- सामुदायिक वन क्षेत्र को बचाने किया ट्रेंच निर्माण
- भानपुर खेड़ा को द्वितीय और छिछारी रैयत को तृतीय पुरस्कार
- वन संरक्षण के कड़े नियमों से सुधरी जंगलों की सेहत
मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत बिछिया के अंतर्गत आने वाली दो ग्राम पर्यावरण समितियों ने जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर पूरे मध्य प्रदेश में मंडला जिले का नाम रोशन किया है। मध्य प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा घोषित वार्षिक जैव विविधता पुरस्कारों में जनपद बिछिया की ग्राम पर्यावरण समिति भानपुर खेड़ा को प्रदेश में द्वितीय और ग्राम छिछारी रैयत को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। दोनों समितियों को राज्य स्तर पर नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है।

जानकारी अनुसार दोनों ग्राम पर्यावरण समितियों की कार्यशैली अलग-अलग होते हुए भी बेहद प्रेरणादायक है। भानपुर खेड़ा समिति ने एक अनोखा नवाचार करते हुए गांव के खाली पड़े श्मशान घाट क्षेत्र की तस्वीर बदल दी। समिति ने व्यापक वृक्षारोपण, आक्रामक खरपतवार प्रजातियों के नियंत्रण और कड़े नियम बनाकर श्मशान भूमि को एक जैव विविधतापूर्ण जीवंत वन क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए समिति को द्वितीय पुरस्कार के रूप में दो लाख रुपये की राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

ट्रेंच निर्माण कर मवेशियों को रोका, पुनर्जीवित हुआ सामुदायिक वन
बताया गया कि ग्राम पर्यावरण समिति छिछारी रैयत ने अपने सामुदायिक वन क्षेत्र को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। समिति ने आक्रामक प्रजातियों को नियंत्रित करने के साथ मवेशियों के अवैध प्रवेश को रोकने के लिए गहरी खाइयों (ट्रेंच) का निर्माण किया। तकनीकी उपायों और कड़े नियमों को लागू कर उन्होंने उजड़ते वन को पुनर्जीवित कर दिया। इस सफलता के लिए समिति को तृतीय पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये की राशि और प्रमाण पत्र से नवाजा गया।

समितियों द्वारा बनाए गए ये कड़े नियम रहे रीढ़ की हड्डी
बताया गया कि ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह साबित किया कि जंगल केवल कहने भर से मां नहीं होता, बल्कि उसकी देखभाल करना समुदाय की जिम्मेदारी है। इसके लिए पेड़ काटने पर जुर्माना, चराई पर प्रतिबंध, घास काटने की छूट जैसे कड़े नियम लागू किए गए थे। एफईएस संस्था के प्रद्युमन आचार्य ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा बनाए गए कड़े नियमों से उन्हें आज यह सफलता मिली है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए इन नियमों में यदि कोई व्यक्ति पेड़ काटते पाया गया, तो उस पर पांच हजार रूपए का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही इसकी सटीक सूचना देने वाले सजग नागरिक को 500 रूपए का नकद इनाम देने का प्रावधान बनाया गया। इसके साथ ही वन क्षेत्र को नया जीवन देने के लिए 1 वर्ष तक मवेशियों के चराने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया। वहीं हरियाली सुरक्षित रखने के साथ ग्रामीणों को राहत देने के लिए इस क्षेत्र से हाथ से घास काटकर चारे के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी गई थी।
पलायन में आई कमी, बढ़ा लघु वनोपज का उत्पादन
इन सामूहिक और सतत प्रयासों का सुखद परिणाम यह रहा कि गांवों से होने वाले रोजगार पलायन में भारी कमी आई है। वनों की सेहत सुधरने से महुआ, अचार, हर्रा-बहेड़ा जैसे लघु वनोपज के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की आय बढ़ी है। बताया गया कि विगत वर्ष अक्टूबर 2025 में इन समितियों द्वारा अपने प्रस्तावों, सामूहिक कार्यवाहियों के दस्तावेजीकरण और वन संरक्षण से संबंधित वीडियो तैयार कर जनपद पंचायत बिछिया के माध्यम से राज्य स्तर पर आवेदन भेजे गए थे। इन अथक और जमीनी प्रयासों को आखिरकार राज्य स्तर पर बड़ी पहचान और सम्मान मिल गया है।










