मंडला से नई रेल क्रांति की पहल
‘नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर’ के लिए पीएम और रेल मंत्री को सौंपा गया प्रस्ताव
- ‘विज़न 2026’ से बदलेगी महाकौशल और छत्तीसगढ़ के वनांचलों की तस्वीर
- कान्हा और अमरकंटक को जोड़ने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य भारत के जनजातीय अंचलों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल की गई है। स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री को एक विस्तृत विकास प्रस्ताव प्रेषित किया है। ‘विज़न 2026’ के नाम से तैयार इस दूरदर्शी प्रस्ताव के माध्यम से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आधुनिक रेल अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करने की पुरज़ोर मांग की गई है।
नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर: विकास की नई धुरी
प्रस्ताव में ‘पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडौरी–मंडला–गोटेगांव’ को जोड़ते हुए ‘नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर’ विकसित करने का खाका खींचा गया है। यह परियोजना:
- पवित्र माँ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित करेगी।
- विंध्य एवं सतपुड़ा के दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल मानचित्र पर लाएगी।
- पिछड़े अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय व्यापार को एक नई गति देगी।
मंडला फोर्ट स्टेशन बनेगा हब टर्मिनल
प्रस्ताव के अनुसार, यदि भविष्य में मंडला को छत्तीसगढ़ के मुंगेली एवं बिलासपुर से रेल मार्ग द्वारा जोड़ा जाता है, तो यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के लिए एक वैकल्पिक और बेहद छोटा माल परिवहन मार्ग साबित होगा। इससे रेलवे के ईंधन की भारी बचत होगी, माल ढुलाई का समय घटेगा और परिचालन लागत में भी बड़ी कमी आएगी।
‘वोकल फॉर लोकल’ और पर्यटन को नया आधार
इस रेल कॉरिडोर के बनने से स्थानीय उत्पादों जैसे— ‘श्री अन्न’ (कोदो-कुटकी), सुप्रसिद्ध गोंडी चित्रकला, वनोपज और हस्तशिल्प को देशव्यापी बाजार मिल सकेगा। इसके अलावा, विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) तक कनेक्टिविटी सुधरने से होटल, होमस्टे और परिवहन उद्योग को पंख लगेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
रेलवे बोर्ड के संज्ञान में पहुंचा मामला
इस जनहितैषी पहल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल शुरू हो गई है। पंजीकरण संख्या MORLY/E/2026/0019457 के माध्यम से इस शिकायत और सुझाव को दर्ज किया गया है। वर्तमान में यह गंभीर मामला सीधे रेलवे बोर्ड के संज्ञान में है और पश्चिम मध्य रेलवे (WCR), जबलपुर के मुख्य परिचालन प्रबंधक (PCOM) कार्यालय में प्रक्रियाधीन बताया गया है।
“केवल पटरी बिछाना नहीं, दिलों को जोड़ना है लक्ष्य”
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी का कहना है कि, “देश आज अमृत काल में अभूतपूर्व बुनियादी कायाकल्प देख रहा है। आदिवासी अंचल में यह परियोजनाएं केवल लोहे की नई रेल पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जनजातीय बहुल क्षेत्र की आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धमनियों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने का एक संवेदनशील प्रयास हैं।”









