बेटी को दहेज नहीं, शिक्षा और संस्कार दें

मंडला के सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ छेड़ी जंग

बेटी को दहेज नहीं, शिक्षा और संस्कार दें

  • वीडियो के जरिए बाल विवाह और दहेज प्रथा पर किया प्रहार
  • ग्रामीण भाषा में बने जागरूकता वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम

मंडला महावीर न्यूज 29। आज के डिजिटल युग में जहाँ सोशल मीडिया का उपयोग अक्सर मनोरंजन के लिए किया जाता है, वहीं आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के युवाओं ने इसे सामाजिक परिवर्तन का हथियार बनाया है। जिले के प्रमुख सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने एकजुट होकर समाज में गहराई तक जड़ें जमा चुकी बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

रचनात्मकता से सामाजिक चेतना का संचार 

सोशल मीडिया क्रिएटर्स के युवाओं ने एक विशेष जागरूकता वीडियो तैयार किया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन कुप्रथाओं के कानूनी और सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को सचेत करना है। इस वीडियो की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और स्थानीय लहजा है। क्रिएटर्स ने ग्रामीण अंचल की भाषा और रोजमर्रा के उदाहरणों का उपयोग किया है, ताकि संदेश सीधे आम जनमानस के दिल तक पहुंच सके।वीडियो में यह मार्मिक अपील की गई है कि बेटियों के हाथों में कम उम्र में चूड़ियां पहनाने के बजाय उन्हें कलम थमाई जाए। दहेज की जगह शिक्षा और संस्कार दें, के मूल मंत्र के साथ यह संदेश दिया गया है कि एक शिक्षित बेटी न केवल अपना भविष्य संवारती है, बल्कि दो परिवारों को भी सशक्त बनाती है।

इन युवाओं का है विशेष योगदान 

इस मुहिम को सफल बनाने में जिले के प्रतिभावान युवाओं की टोली ने कड़ी मेहनत की है। इस रचनात्मक टीम में मंडला जिले के सोशल मीडिया क्रिएटर्स सदस्य शामिल हैं। इस दिल को छूने वाली छोटी सी स्टोरी में कलाकार व नेतृत्व करने वाले कलाकार में नितिन देव चौहान, फारुख खान, रोहित प्रशांत चौकसे, रितु सिसोदिया, माही मार्को के साथ कैमरामैन की भूमिका नंदनी, आदित्य और आशीष उईके की है।

स्टोरी के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास 

वीडियो के माध्यम से लोगों को यह स्पष्ट रूप से समझाया गया है कि बाल विवाह करना और दहेज का लेन-देन करना केवल सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी अपराध है। कानून का उल्लंघन करने पर होने वाली सजा और कानूनी कार्रवाई के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है। स्थानीय प्रशासन और इन क्रिएटर्स ने सामूहिक रूप से जनता से अपील की है कि इस वीडियो को अधिक से अधिक साझा करें। उनका मानना है कि जब यह संदेश हर गांव और हर घर की चौखट तक पहुंचेगा, तभी समाज की सोच में वास्तविक बदलाव आएगा। मंडला के युवाओं की इस पहल की अब चारों ओर सराहना हो रही है। यह प्रयास साबित करता है कि यदि युवा शक्ति सही दिशा में कार्य करे, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक जागरूक और बेहतर भारत का निर्माण किया जा सकता है।



 

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