मध्यान्ह भोजन रसोइयों का फूटा गुस्सा
सरकार के खिलाफ कोर्ट जाने की रणनीति, जिले भर में धरना प्रदर्शन शुरू
- 40 साल से शोषण और मात्र 4000 मानदेय
- रसोइया उत्थान संघ ने खोला मोर्चा, विधायकों से करेंगे संपर्क
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम की रीढ़ माने जाने वाले रसोइयों ने अब अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। रसोइया उत्थान संघ समिति द्वारा संस्थापक पीडी खैरवार के मार्गदर्शन में जिले भर में संवैधानिक और शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन का अभियान शुरू किया गया है। इसी कड़ी में 15 मार्च को बीजाडांडी व मवई और 23 मार्च को घुघरी के सलवाह में जोरदार प्रदर्शन किया गया।
धरना प्रदर्शन के दौरान रसोइयों ने सरकार के अमानवीय रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। संघ का कहना है कि लगभग चार दशकों से सेवा देने के बाद भी सरकार ने उन्हें अस्थाई कर्मी बनाकर रखा है। रसोइयों ने निर्णय लिया है कि वे इस निरंतर जारी शोषण से बचने के लिए अब माननीय न्यायालय की शरण लेंगे। साथ ही, विधानसभा सत्र में अपनी समस्याओं को उठाने के लिए क्षेत्रीय विधायकों से संपर्क कर प्रश्न दर्ज कराने की रणनीति बनाई गई है।
रसोइयों की प्रमुख मांगें और समस्याएं
प्रदर्शन के दौरान रसोइयों ने अपनी लंबित समस्याओं को प्रमुखता से रखा। जिसमें इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में मात्र 4000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो काम के घंटों के लिहाज से बहुत कम है। काम करने के बावजूद जून माह का मानदेय भुगतान नहीं किया जाता और गर्मियों की छुट्टियों में उन्हें बेरोजगार कर दिया जाता है। 62 वर्ष की आयु के बाद काम से हटाए जाने पर पेंशन, बीमा या जीवन निर्वाह के लिए कोई एकमुश्त राशि का प्रावधान नहीं है। स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने या एक शाला-एक परिसर जैसे नियमों के कारण कई रसोइयों को अचानक काम से निकाल दिया जाता है।
नेतृत्व और आगामी योजना
इस अभियान का नेतृत्व जिला कार्यकारिणी से जयंती अहिरवार, सुरेश बघेल, कुंवर सिंह मरकाम, गंगोत्री विश्वकर्मा, गणेश धुर्वे, कृष्णा धार्वैया, रम्मू साहू और दिनेश बघेल ने किया। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक रसोइयों के हित में स्थाई नीति नहीं बनाई जाती, तब तक विकासखंड वार यह प्रदर्शन जारी रहेगा।









