शराब बेचने और पीने वालों पर लगेगा भारी जुर्माना

पायली बाहुर में गूंजा नशामुक्त गांव का संकल्प

शराब बेचने और पीने वालों पर लगेगा भारी जुर्माना

  • पेसा एक्ट के तहत बाहुर ग्राम सभा का ऐतिहासिक फैसला
  • शिकायत बताने वाले को मिलेगा दो हजार का नकद इनाम

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के निवास ब्लाक की ग्राम पंचायत पायली बाहुर के ग्राम बाहुर में पेसा एक्ट के तहत एक ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस ग्राम सभा में ग्रामीणों ने एकजुट होकर गांव को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए कड़े सामाजिक नियमों को लागू करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।जानकारी अनुसार ग्राम बाहुर में आयोजित यह विशेष ग्राम सभा शांति एवं विवाद निवारण समिति के अध्यक्ष मदन सिंह वरकड़े की अध्यक्षता में संपन्न हुई। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच विनोद सिंह परस्ते मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुषों के साथ-साथ मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी रही।

नारी शक्ति ने उठाई आवाज, तय हुआ कड़ा दंड 

बताया गया कि ग्राम बाहुर की महिलाओं ने गांव में बढ़ती नशे की लत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पूर्ण शराबबंदी का पुरजोर आह्वान किया। महिलाओं के इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए ग्राम सभा ने दंड का प्रावधान तय किया है। जिसमें कहां गया है कि यदि कोई व्यक्ति गांव में अवैध शराब बनाते हुए पकड़ा जाता है, तो समाज द्वारा उस पर 10 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। शराब खरीदने या पीकर उत्पात मचाने वाले व्यक्ति को 5 हजार रुपए जुर्माना भरना होगा। इसके साथ ही नशाखोरी की सटीक जानकारी देने वाले सजग नागरिक को समाज की ओर से 2 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

बर्बादी से युवा पीढ़ी को बचाने की पहल 

शराबबंदी के इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण गिरता हुआ शिक्षा का स्तर और युवाओं का गलत दिशा में भटकना है। ग्रामीणों का मानना है कि शराब के कारण न केवल आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है।

सहयोग की अपील 

सरपंच विनोद सिंह परस्ते और समिति अध्यक्ष मदन सिंह वरकड़े ने सभी ग्रामवासियों से इस मुहिम में ईमानदारी से सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि गांव में शांति, सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने के लिए लिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब बाहुर गांव क्षेत्र में सामाजिक सुधार के एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।



रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे


 

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