चैत्र मास में माँ नर्मदा की उत्तरवाहिनी परिक्रमा का विशेष महत्व
- श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार कर सकेंगे पुण्य लाभ
- मंडला में जारी है उत्तरवाहिनी परिक्रमा की अनूठी परंपरा
- सिद्ध घाट रेवा दरबार ने श्रद्धालुओं को दी जानकारी
मंडला महावीर न्यूज 29. चैत्र मास के पावन अवसर पर मां नर्मदा की उत्तरवाहिनी परिक्रमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। संध्या आरती मंच, श्री सिद्ध घाट रेवा दरबार मंडला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु इस पवित्र महीने में अपनी सुविधानुसार किसी भी दिन परिक्रमा कर मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
परंपरा और इतिहास
गुजरात में वर्षों से चली आ रही उत्तरवाहिनी परिक्रमा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंडला में पहली बार 15 अप्रैल को इस आयोजन की शुरुआत की गई थी। तब से यह आयोजन निरंतर जारी है और प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
सुविधाजनक मार्ग और व्यवस्था
मान्यता के अनुसार, उत्तरवाहिनी परिक्रमा में लगभग दो कोस की दूरी पूर्ण करना आवश्यक होता है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संध्या आरती मंच द्वारा सुरंगदेवरी से तट परिवर्तन की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्तगण एक ही दिन में निर्धारित दूरी तय कर परिक्रमा सफलतापूर्वक संपन्न कर लेते हैं।
श्रद्धालुओं से अपील
संध्या आरती मंच, श्री सिद्ध घाट रेवा दरबार के पदाधिकारियों ने सभी नर्मदा भक्तों से आह्वान किया है कि वे अपने परिवार, मित्रों या समूह के साथ इस पवित्र परिक्रमा में सम्मिलित हों। साथ ही, परिक्रमा के दौरान माँ नर्मदा के तटों की स्वच्छता बनाए रखने, धार्मिक मर्यादाओं का पालन करने और शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा पूर्ण करने की विशेष अपील की गई है।










