सेहत वाली होली, केमिकल को मात
जिले में फूलों और सब्जियों से महका हर्बल गुलाल, 1200 महिलाओं को मिला स्वरोजगार
- देसी तरीके से तैयार हो रहे प्राकृतिक रंग, बाजार में बढ़ी मांग
- सब्जियों और फूलों से निखर रहे रंग
मंडला महावीर न्यूज 29. रंगों के पर्व होली पर इस बार बाजार में केमिकल युक्त रंगों के बजाय प्राकृतिक चमक बिखेरने की तैयारी है। जिले के हिरदेनगर और कटंगा टोला सहित आसपास के 16 गांवों की महिलाएं इन दिनों सुरक्षित और हर्बल गुलाल तैयार करने में जुटी हैं। यह पहल न केवल लोगों की त्वचा और आंखों की सुरक्षा कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है।
संस्था से जुड़ी संगीता गुप्ता ने बताया कि इन रंगों को बनाने में पूरी तरह प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। जिसमें पालक की भाजी और औषधीय पत्तियों से, चुकंदर और गुड़हल के फूलों से। गेंदे के फूलों और हल्दी के मिश्रण समेत अन्य सामग्रियों को धूप में सुखाकर पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसा जाता है, जिससे इनकी प्राकृतिक गुणवत्ता बनी रहती है।
1200 महिलाओं को मिल रहा सीधा रोजगार
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से माहिष्मती फार्माज पिछले कई वर्षों से कार्य कर रही है। संस्था के नीलेश कुमार दुबे ने बताया कि वर्तमान में करीब 1200 महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी हैं। होली के अलावा अन्य त्यौहारों पर भी इन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में ये हर्बल रंग मंडला में ऑफलाइन केंद्रों के साथ-साथ ऑनलाइन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केमिकल का सुरक्षित विकल्प
बाजार में मिलने वाले सस्ते रंगों में मौजूद केमिकल से त्वचा एलर्जी, बालों का झडऩा और आंखों में जलन जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं। इसके विपरीत, महिलाओं द्वारा तैयार यह हर्बल गुलाल बच्चों और बुजुर्गों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। रंगों के साथ-साथ ये समूह गुड़ के विभिन्न फ्लेवर, आंवला कैंडी और कोदो-कुटकी जैसे पौष्टिक उत्पाद भी तैयार कर रहे हैं, जिससे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।










