डोलोमाइट खदानों की ब्लास्टिंग से स्कूल की दीवारों में आई दरारें
कवरेज करने गए पत्रकार को बनाया बंधक, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
- खौफ के साये में बच्चों का बचपन, घरों में भूकंप जैसा कंपन
- मंडला में खनन माफिया का आतंक
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर बम्हनी क्षेत्र के बीजेगांव में डोलोमाइट खदानों के अवैध संचालन और बेतहाशा ब्लास्टिंग ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि यहाँ के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भवन अब खंडहर में तब्दील होने लगे हैं। भारी धमाकों के कारण स्कूल की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे मासूम बच्चे और शिक्षक मौत के साये में बैठने को मजबूर हैं।
भूकंप जैसा कंपन, खंडहर होता स्कूल
बीजेगांव के ग्रामीणों के मुताबिक, खदानों में रात के समय भीषण ब्लास्टिंग की जाती है, जिससे पूरा इलाका दहल जाता है। कंपन इतना तेज होता है कि घरों के बर्तन और खिड़कियां हिलने लगती हैं। स्कूल के रसोईघर की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहाँ छत का मलबा गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नए बने पक्के मकानों में भी दरारें आ गई हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद खनिज विभाग और जिला प्रशासन केवल खानापूर्ति कर रहा है।
पत्रकार को बनाया बंधक, की अभद्रता
इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश करने पहुँचे एक पत्रकार के साथ खदान क्षेत्र में गंभीर घटना घटी। 18 फरवरी 2026 को जब पत्रकार कवरेज के लिए पहुँचे, तो खदान कर्मचारी योगेश पटैल व अन्य ने उनके साथ अभद्रता की। आरोप है कि पत्रकार को बंधक बनाकर डराया-धमकाया गया, मारपीट की कोशिश की गई और उनका मोबाइल तक तोड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद ही पत्रकार को वहां से सुरक्षित निकाला जा सका। इस घटना से स्पष्ट है कि खदानों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अवैध खनन और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप
क्षेत्र में दर्जनों डोलोमाइट खदानें बाहुबल और पैसे की दम पर संचालित हो रही हैं। ओवरलोड वाहनों ने सरकारी सड़कों को जर्जर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि खदान संचालकों को खनिज विभाग का खुला संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण आज तक कोई ठोस भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं?
खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की जांच कराएंगे, लेकिन ग्रामीणों के लिए यह आश्वासन अब बेमानी हो चुका है।










