निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ ग्राहक पंचायत मुखर
- मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
- निर्धारित दुकानों से ड्रेस-किताबें खरीदने के दबाव
- अवैध फीस वृद्धि पर रोक लगाने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत महाकोशल प्रांत ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के साथ किए जा रहे आर्थिक शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर आगामी शैक्षणिक सत्र से पूर्व निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में कहां गया है कि मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित निजी विद्यालय अभिभावकों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूल रहे हैं। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन द्वारा पुस्तकों, कॉपियों, यूनिफॉर्म और जूते-मोजे केवल निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दबाव बनाया जाता है। ग्राहक पंचायत ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि स्कूलों की यह प्रवृत्ति शिक्षा को सेवा के स्थान पर विशुद्ध व्यवसाय बना रही है।
अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक और मानसिक बोझ
ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि वर्तमान समय विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि वार्षिक परीक्षाएं समाप्त होने के बाद नए सत्र में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी। इसी दौरान स्कूल प्रबंधन द्वारा बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के ट्यूशन फीस और वार्षिक शुल्क में अनुचित वृद्धि की जाती है। स्कूल विशेष प्रकाशक या दुकान का नाम अनिवार्य कर देते हैं, जिससे बाजार में मुक्त प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है और अभिभावकों को अधिक मूल्य चुकाना पड़ता है। बच्चों के भविष्य के डर से अधिकांश अभिभावक विरोध नहीं कर पाते, जिससे उनके मानसिक तनाव और पारिवारिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
संगठन की प्रमुख मांगें
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने सरकार से मांग की है कि नए सत्र से पहले सभी जिलों में निर्देश जारी हों कि कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। स्कूल केवल पुस्तकों की सूची दें, किसी प्रकाशक या विक्रेता का नाम अनिवार्य न करें। जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी समिति सक्रिय की जाए जो फीस वृद्धि की जांच करे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर के अधीन एक स्वतंत्र शिकायत तंत्र स्थापित हो। नियमों के उल्लंघन पर स्कूलों की मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण जैसी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन के माध्यम से निवेदन किया गया है कि यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाता है, तो प्रदेश के लाखों अभिभावकों और विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।









