ग्रेड सुधारने के लिए आपस में बदले गए शिक्षक

बबलिया संकुल में शिक्षा का एक्सचेंज प्रोग्राम

ग्रेड सुधारने के लिए आपस में बदले गए शिक्षक

  • ए-बी ग्रेड के शिक्षक सिखाएंगे हुनर
  • डी-ई ग्रेड की शालाओं में दिखेगा बदलाव
  • संकुल प्राचार्य डीके सिंगौर की अनूठी पहल

मंडला महावीर न्यूज 29. सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता और ग्रेडिंग सुधारने के उद्देश्य से संकुल केंद्र बबलिया में एक अभूतपूर्व नवाचार किया गया है। मेरा विद्यालय, सुंदर विद्यालय कार्यक्रम के तहत संकुल प्राचार्य डीके सिंगौर के नेतृत्व में ए और बी ग्रेड विद्यालयों के शिक्षकों की तैनाती डी और ई ग्रेड कमजोर प्रदर्शन वाले विद्यालयों में की गई है। वहीं कमजोर ग्रेड वाले स्कूलों के शिक्षक उत्कृष्ट स्कूलों में जाकर वहां की कार्यप्रणाली सीख रहे हैं।बताया गया कि यह विशेष अदला-बदली कार्यक्रम पांच दिन के लिए लागू किया गया है। इसके तहत शिक्षक सुबह की प्रार्थना से लेकर शाम की छुट्टी तक बदली हुई शाला में ही रहकर कार्य किये, ए और बी ग्रेड के शिक्षक अपने स्कूलों के सफल प्रयोगों को कमजोर स्कूलों में लागू कर रहे हैं, जिससे वहां का वातावरण सुधर सके। डी और ई ग्रेड के शिक्षक उत्कृष्ट स्कूलों में अनुशासन, अध्यापन शैली और प्रबंधन का अवलोकन कर प्रेरणा ले रहे हैं।

प्रतिदिन तैयार होगा रिपोर्ट कार्ड 

इस नवाचार की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मॉनिटरिंग है। प्रत्येक शिक्षक को प्रतिदिन का प्रतिवेदन तैयार करना अनिवार्य है। इसमें वे संबंधित शाला की खूबियों, कमियों और स्वयं द्वारा किए गए विशेष प्रयासों का उल्लेख करेंगे। सप्ताह के अंत में संकुल प्राचार्य इन प्रतिवेदनों की समीक्षा करेंगे और परिणाम सकारात्मक रहने पर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

तीन दिनों में ही दिखने लगा बदलाव 

व्हाट्सएप गु्रप और प्रारंभिक मॉनिटरिंग के माध्यम से इस प्रयोग के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। मात्र तीन दिनों में ही स्कूलों में विभिन्न सुधार देखे गए हैं। जिसमें विद्यार्थियों के व्यवहार और स्कूलों के अनुशासन में स्पष्ट सुधार। टीएलएम का बड़े पैमाने पर निर्माण। मध्याह्न भोजन व्यवस्था में सुधार और स्कूल से घर जाते समय बच्चों द्वारा पहाड़़े व कविताओं का सामूहिक वाचन।

मेरा विद्यालय, सुंदर विद्यालय का विस्तार 

बताया गया कि प्रभारी संकुल प्राचार्य डीके सिंगौर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी रहते हुए इस अभियान की शुरुआत की थी, जिसके सुखद परिणाम पूरे ब्लॉक में देखे गए थे। वर्तमान में वे इस मिशन को बबलिया संकुल में सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं। इस प्रयोग से शिक्षकों और बच्चों दोनों में जबरदस्त उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ है।



 

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