बबलिया के निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर लूट

बबलिया के निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर लूट

  • भारी फीस और अव्यवस्थाओं से ग्रामीण परेशान, प्रशासन से जांच की मांग
  • जेएमआर पब्लिकेशन और सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल पर शोषण के आरोप
  • आक्रोशित पालकों ने खोला मोर्चा

मंडला महावीर न्यूज 29. स्थानीय क्षेत्र देवरी कला बबलिया में संचालित निजी स्कूल जेएमआर पब्लिकेशन स्कूल और सरस्वती ज्ञान मंदिर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। क्षेत्र के आदिवासी छात्र-छात्राओं और उनके पालकों ने स्कूल प्रबंधन पर फीस के नाम पर आर्थिक शोषण करने और मूलभूत सुविधाएं न देने का आरोप लगाया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत देवरी कला के सरपंच देवचरण पंद्राम और उपसरपंच संजय सोनी से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।
पालकों का आरोप है कि ये स्कूल हर वर्ष एडमिशन के नाम पर प्रत्येक छात्र से 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूलते हैं, जबकि नियमानुसार एडमिशन एक ही बार होता है। इसके अलावा वार्षिक उत्सव के नाम पर बच्चों से भारी भरकम राशि वसूली जाती है। उदाहरण के तौर पर हाल ही में जेएमआर स्कूल द्वारा प्रति बच्चा 500 रुपये वसूल किए गए, जिससे करीब 75 हजार की राशि एकत्रित हुई, जबकि कार्यक्रम का वास्तविक खर्च महज 24 हजार रुपये बताया जा रहा है।

सुविधाओं का अभाव 

शिकायत में यह भी बताया गया है कि स्कूलों में छात्र-छात्राओं के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। पर्याप्त शौचालय और खेल मैदान का भी अभाव है। शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि स्कूलों में अप्रशिक्षित बगैर बीएड, डीएड शिक्षकों से कार्य कराया जा रहा है। शिक्षकों को महज ३ से ४ हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। इसके साथ ही मेंटेनेंस के नाम पर भी प्रति छात्र २०० रुपये सालाना वसूले जाते हैं।

कमीशनखोरी का आरोप 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन हर साल जानबूझकर पुस्तकें बदल देता है जिससे पुरानी पुस्तकें किसी अन्य बच्चे के काम न आ सकें। आरोप है कि संचालक स्वयं पुस्तकें खरीदकर एक विशेष दुकान पर रखवा देते हैं और वहां से साठगांठ कर भारी-भरकम बिल बनवाए जाते हैं, जो सीधे तौर पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।

आंकड़ों का गणित, लाखों की कमाई, सुविधा शून्य 

ग्राम पंचायत पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था की वार्षिक आय लगभग ११.९० लाख रुपये है। मकान किराया और शिक्षकों के मानदेय लगभग १४ हजार प्रतिमाह को काटकर संस्था को सालाना १० लाख रुपये की बचत होती है, फिर भी बच्चों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं।

जांच की मांग 

छात्रों के शोषण और टीसी के लिए परेशान किए जाने जैसी शिकायतों से दुखी होकर पालकों और ग्राम पंचायत देवरी कला ने जिला प्रशासन और विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि इन शालाओं की गतिविधियों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही कर छात्र-छात्राओं को इस शोषण से मुक्त कराया जाए।


 

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