नर्मदा जल ही ऊर्जा का स्रोत, वैज्ञानिक भी हैरान

निराहार रहकर साढ़े चार वर्षों से नर्मदा साधना कर रहे दादागुरु पहुंचे निवास, जयकारों से गूँज उठा क्षेत्र

महातपस्वी दादागुरु की नर्मदा परिक्रमा यात्रा निवास क्षेत्र पहुंची

  • श्रद्धा और भक्ति के अनूठे संगम में उमड़ा जनसैलाब
  • नर्मदा जल ही ऊर्जा का स्रोत, वैज्ञानिक भी हैरान
  • भारतीय परिधान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर बढ़ रही दादागुरु की यात्रा

मंडला महावीर न्यूज 29. वर्षों से अन्न का त्याग कर केवल नर्मदा जल के आधार पर जीवित रहकर कठिन तपस्या करने वाले महाकौशल के संत भैया जी सरकार (दादागुरु) की नर्मदा परिक्रमा यात्रा बुधवार को निवास क्षेत्र पहुंची। ग्राम हाथीतारा से शुरू हुई यह यात्रा जैसे ही गुंदलई और भीखमपुर पहुंची, पूरा वातावरण नर्मदे हर के जयकारों से गूँज उठा। बैंड-बाजों और पुष्प वर्षा के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने दादागुरु का भव्य स्वागत किया।

दादागुरु ने 17 अक्टूबर 2020 से अन्न, भोजन और फलाहार का पूर्ण त्याग कर यह महाव्रत शुरू किया था। ताज्जुब की बात यह है कि बिना कुछ खाए वे प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर (कभी-कभी 40 किमी) की पैदल यात्रा करते हैं। उनके इस तप को देखकर डॉक्टर और वैज्ञानिक भी हैरान हैं। मेडिकल काउंसिल की टीम ने 7 दिनों तक उनकी सघन जांच की, लेकिन विज्ञान अब तक इस गुत्थी को नहीं सुलझा पाया है कि कोई व्यक्ति इतने वर्षों तक केवल जल पर रहकर इतना सक्रिय कैसे रह सकता है।

पर्यावरण और भारतीय परिधान का संदेश 

परिक्रमा के दौरान दादागुरु केवल श्वेत लंगोट धारण करते हैं और अपने अनुयायियों को भी भारतीय परिधान (धोती-कुर्ता) पहनने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि मां नर्मदा केवल नदी नहीं और वृक्ष केवल लकड़ी नहीं, बल्कि साक्षात देवी-देवता हैं। यात्रा के दौरान जहां कहीं भी कटे हुए वृक्ष दिखाई देते हैं, तो पर्यावरण प्रेमी दादागुरु का क्रोध देख लोग वृक्षों के महत्व को समझते हैं।

स्वागत में उमड़ा प्रशासनिक अमला और जनशक्ति 

यात्रा के दौरान मां नर्मदा सेवा समिति निवास द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद यात्रा बिझौली, अमगांव, बिसौरा और मानिकपुर होते हुए देर शाम डिंडोरी जिले के शहपुरा (बिछिया) पहुंची। इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्था में निवास थाना प्रभारी वर्षा पटेल, जनपद सीईओ श्रद्धा चौबे सोनी, एसडीएम सी.एल. वर्मा सहित शहपुरा और बिछिया पुलिस का विशेष सहयोग रहा।

दो हजार अनुयायी चल रहे पैदल 

दादागुरु के जत्थे में लगभग 2000 अनुयायी पैदल चल रहे हैं। प्रतिदिन सुबह मां नर्मदा की महाआरती के बाद यात्रा शुरू होती है। रात्रि विश्राम के दौरान दादागुरु प्रवचन के माध्यम से जनमानस को नर्मदा संरक्षण, स्वच्छता और प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि प्रकृति ही हमारा असली आहार है और इसके संरक्षण के बिना जीवन की कल्पना असंभव है।



रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे


 

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