गोवर्धन लीला की जीवंत झांकी देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

जिलेहटा में गूँजे श्रीकृष्णा के जयकारे: गोवर्धन लीला की जीवंत झांकी देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

  • इंद्र का अहंकार और कन्हैया का प्रेम
  • भागवत कथा में धूमधाम से मनाया गया छप्पन भोग और गोवर्धन उत्सव

मंडला महावीर न्यूज 29.| निवास क्षेत्र के ग्राम जिलेहटा में प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार को भक्ति और आनंद की अविरल धारा बही। कटनी (नदावन) से पधारे आचार्य श्री उदय प्रकाश पाण्डेय ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

बाल लीलाओं का रसास्वादन

कथा प्रसंग के दौरान आचार्य श्री ने प्रभु के जन्मोत्सव, नामकरण संस्कार, पूतना वध और माखन चोरी की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से न केवल कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों का संहार किया, बल्कि ब्रजवासियों को असीम आनंद और प्रेम की अनुभूति भी कराई।

इंद्र का मान-मर्दन और गोवर्धन पूजा

कथा के मुख्य प्रसंग ‘गोवर्धन लीला’ पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि जब देवराज इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर अभिमान हो गया, तब उनके अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में इंद्र की पूजा बंद कराकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराई। क्रोधित इंद्र द्वारा की गई मूसलाधार वर्षा से ब्रजवासियों को बचाने के लिए कन्हैया ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया। अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने प्रभु की शरण ली।

झांकी और भजनों पर थिरके श्रद्धालु

कथा के दौरान भगवान गिरिराज जी को उंगली पर उठाए हुए अत्यंत मनमोहक झांकी सजाई गई। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गोवर्धन पूजन किया और छप्पन भोग अर्पित किए। संगीतमय भजनों की धुन पर पंडाल में मौजूद महिला व पुरुष श्रद्धालु देर तक झूमते-नाचते रहे।

रुक्मणी विवाह आज

कार्यक्रम में आचार्य रमाकांत शास्त्री और प्रदीप धर (लट्टू महाराज) की गरिमामयी उपस्थिति रही। कथा समिति ने बताया कि बुधवार को कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी का विवाह प्रसंग बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें विशेष विवाह झांकी आकर्षण का केंद्र रहेगी।


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