श्रद्धा और विश्वास का संगम
- महाराजपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब
- औघड़ संत दादा धनीराम की मनाई 56वीं पुण्यतिथि
- देर शाम तक चला विशाल भंडारा
- दादा धनीराम आश्रम में दूर-दूर से पहुंचे भक्त
- महाआरती और अभिषेक के साथ मनाई पुण्यतिथि
मंडला महावीर न्यूज 29. उपनगर महाराजपुर स्थित नर्मदा तट पर विराजे सिद्ध औघड़ संत श्री दादा धनीराम जी की 56वीं पुण्यतिथि पूर्ण गरिमा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दादा धनीराम आश्रम में आध्यात्मिक कार्यक्रमों की धूम रही और सुबह से लेकर देर शाम तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
धार्मिक अनुष्ठानों से गूंजा आश्रम
पुण्यतिथि महोत्सव की शुरुआत पूर्व संध्या पर भव्य महाआरती के साथ हुई। मुख्य दिवस पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ दादाजी के विशेष पूजन-अर्चन, अभिषेक और श्रृंगार के साथ हुआ। माँ नर्मदा और दादाजी को भोग लगाने के बाद सुबह 11 बजे से भंडारा प्रारंभ किया गया, जो अनवरत शाम तक चलता रहा।
दूर-दूर से जुटे अनुयायी
दादा धनीराम जी की ख्याति और उनके प्रति अटूट श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस कार्यक्रम में मंडला जिले के साथ-साथ रायपुर, मुंबई, नागपुर, बालाघाट और सिवनी जैसे शहरों सहित विदेशों से भी उनके अनुयायी महाराजपुर पहुँचे। आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष और सदस्यों ने बताया कि दादाजी के प्रति लोगों का विश्वास समय के साथ और गहरा होता जा रहा है।
चमत्कारिक व्यक्तित्व और अटूट मान्यता
भक्तों ने बताया कि दादा धनीराम एक ऐसे संत थे जिन्होंने 1927 से 1970 तक महाराजपुर में रहकर मानव कल्याण के लिए कार्य किया। उनकी अश्लील समझी जाने वाली गालियां भी भक्तों के लिए आशीर्वाद बन जाती थीं। मान्यता है कि दादा के दरबार में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है और मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त यहाँ आकर भंडारा कराते हैं। आश्रम परिसर के बारे में कहा जाता है कि यहाँ साक्षात् माता अन्नपूर्णा का वास है, जिसके कारण हजारों लोगों के भोजन के बाद भी कभी कमी नहीं आती।
मानव सेवा को समर्पित जीवन
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि दादा धनीराम जी का जीवन हठ योग और जनसेवा का प्रतीक था। उनके द्वारा किए गए चमत्कारों की कहानियां आज भी भक्तों की जुबान पर हैं। पुण्यतिथि के इस सफल आयोजन में ट्रस्ट के समस्त सदस्यों और स्थानीय नागरिकों का विशेष सहयोग रहा।
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गालियाँ थीं आशीर्वाद और हाथ में बंधा था हँसिया – Mahaveer News 29










