मंगलेश्वर महादेव और रावण द्वारा स्थापित शिवलिंग की महिमा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

मंगलेश्वर महादेव और रावण द्वारा स्थापित शिवलिंग की महिमा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

  • सहस्त्रधारा में शिव भक्ति का संगम
  • पं. दिवाकर चौबे ने बताया माँ नर्मदा और महादेव की कृपा का महत्व

मंडला महावीर न्यूज 29. सागर में आयोजित पावन नर्मदा पुराण कथा के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कथा के विशेष प्रसंग में प्रसिद्ध कथावाचक पं. दिवाकर चौबे ने महाराजपुर स्थित मंगलेश्वर महादेव और सहस्त्रधारा की दिव्य महिमा का सजीव वर्णन किया, जिसे सुनकर पाण्डाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

मनोकामना पूर्ण करते हैं मंगलेश्वर महादेव 

पं. दिवाकर चौबे ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि महाराजपुर स्थित मंगलेश्वर महादेव मंदिर केवल एक प्राचीन तीर्थ नहीं, बल्कि भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला जाग्रत केंद्र है। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से बताया कि जो भी भक्त सच्चे मन और अटूट विश्वास के साथ यहाँ शिव पूजन करता है, उसके जीवन के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे अलौकिक शांति प्राप्त होती है।

सहस्त्रधारा और रावण का संबंध 

कथा के दौरान सहस्त्रधारा क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह वह पावन स्थल है जहाँ लंकापति रावण ने स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी। माँ नर्मदा की अनंत धाराओं के बीच स्थित यह क्षेत्र तप और साधना के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। पं. चौबे के अनुसार, सहस्त्रधारा में दर्शन मात्र से अंत:करण शुद्ध होता है और मनुष्य के पापों का क्षय होता है।

मोक्षदायिनी माँ नर्मदा की महिमा 

माँ नर्मदा को साक्षात मोक्षदायिनी बताते हुए कथावाचक ने कहा कि उनके दर्शन और स्मरण मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। नर्मदा तट को उन्होंने आत्मशुद्धि का मार्ग बताया। कथा के दौरान पूरा वातावरण हर-हर महादेव और जय नर्मदे के जयघोष से गूंज उठा। कई श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबकर भावुक नजर आए। आयोजकों ने बताया कि कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में जनसैलाब उमड़ रहा है, जो आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहा है।


 

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