चैनसिंह की बदली तकदीर, खेती के साथ डेयरी से बने आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना

चैनसिंह भांडे की बदली तकदीर, खेती के साथ डेयरी से बने आत्मनिर्भर

  • मंडला के किसान चैनसिंह को मिली नई पहचान
  • मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से हर माह कमा रहे ₹14 हजार

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक क्रांति का सूत्रधार बन रही है। किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब धरातल पर रंग लाने लगी है। इसका ताजा उदाहरण मंडला विकासखंड के ग्राम ग्वारा में देखने को मिला है, जहाँ किसान श्री चैनसिंह भांडे ने पशुपालन को अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी बनाई है।

खेती की चुनौतियों के बीच चुना नया रास्ता

श्री चैनसिंह भांडे लंबे समय से पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। मौसम की अनिश्चितता और खेती की बढ़ती लागत के कारण उन्हें परिवार चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने आय का एक स्थायी स्रोत विकसित करने का संकल्प लिया और पशुपालन के क्षेत्र में कदम रखा। शासन के मार्गदर्शन और ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना’ ने उनके इस संकल्प को हकीकत में बदल दिया।

सरकारी सहायता ने दी सपनों को उड़ान

योजना के तहत चैनसिंह को 2.95 लाख रुपये का स्वीकृति लाभ प्राप्त हुआ। 13 सितंबर 2025 को उन्हें योजना के माध्यम से दो उन्नत नस्ल की भैंसें प्रदान की गईं। बेहतर पशु प्रबंधन, चारा व्यवस्था और उचित देखरेख के चलते उनका डेयरी व्यवसाय तेजी से पटरी पर आ गया।

आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

आज चैनसिंह भांडे डेयरी व्यवसाय से प्रतिमाह 13 से 14 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त कर रहे हैं। इस अतिरिक्त कमाई से उनके परिवार के जीवनस्तर में बड़ा सुधार आया है। बच्चों की शिक्षा और घर की जरूरतों को पूरा करने में अब उन्हें कोई आर्थिक तंगी नहीं होती।

“यह योजना मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस पहल ने मुझे आत्मनिर्भर बनाया है। अब मैं खेती के साथ-साथ एक सफल डेयरी व्यवसायी के रूप में सम्मान के साथ जी रहा हूँ।” — चैनसिंह भांडे, लाभार्थी किसान

गाँव के लिए बने प्रेरणास्रोत

चैनसिंह की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे आज ग्राम ग्वारा के अन्य किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं। उनकी सफलता को देख गाँव के अन्य युवा और किसान भी अब कृषि के साथ-साथ पशुपालन को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।



Leave a Comment