नैनपुर में सिस्टम की भेंट चढ़ीं नहरें, कागजों पर हर खेत को पानी
- धरातल पर प्यासे हैं किसानों के खेत
- सिल्ट और झाडिय़ों में गुम हुई माइनर नहरें
- बदहाली के कारण अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पा रहा सिंचाई का पानी
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश की मोहन सरकार जहाँ एक ओर हर खेत को पानी पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं नैनपुर क्षेत्र में सिंचाई विभाग की लापरवाही इन दावों की पोल खोल रही है। क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुख्य नहरें और उनकी उप-नहरें (माइनर) रख-रखाव के अभाव में दम तोड़ रही हैं। आलम यह है कि नहरें अब कूड़ेदान और झाडिय़ों के झुरमुट में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे टेल एंड पर स्थित गाँवों तक पानी पहुँचना असंभव हो गया है।
बताया गया कि गाद और कटाव से बढ़ा खतरा नहरों की वर्तमान स्थिति की पड़ताल करने पर डरावनी तस्वीर सामने आती है। सालों से सफाई न होने के कारण नहरों की तलहटी में भारी सिल्ट (गाद) जमा हो गई है। कई स्थानों पर झाडिय़ों और खरपतवार ने पानी के बहाव को पूरी तरह रोक दिया है। इसके अलावा, नहरों की पटरियाँ कई जगह से क्षतिग्रस्त हैं, जिससे पानी का दबाव बढ़ते ही नहर टूटने और फसलों के डूबने का खतरा हमेशा बना रहता है।
किसानों की बढ़ रही मुश्किलें
नहरों में पानी होने के बावजूद खेतों तक न पहुँचने से किसान आक्रोशित हैं। स्थानीय किसान अवनीश ठाकुर ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया नहर विभाग केवल कागजों पर सफाई का कोरम पूरा करता है। पानी के अभाव में हमें निजी ट्यूबवेलों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत दोगुनी हो गई है। अन्य किसानों का आरोप है कि अधिकारी केवल मॉनसून में बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर ही जागते हैं, शेष वर्ष कोई सुध नहीं ली जाती।
अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब
जब इस संबंध में सिंचाई विभाग के जिम्मेदारों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह बजट की कमी का रोना रोया। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि रोस्टर के अनुसार सफाई कार्य प्रस्तावित है और जल्द ही विशेष अभियान चलाकर अंतिम छोर तक पानी पहुँचाया जाएगा।










