जिले के नाम पर उबाल, रेल सुविधाओं पर सन्नाटा
- विकास के असल मुद्दों पर कब दिखेगी एकजुटता
- नाम परिवर्तन के विरोध जैसी तीव्रता रेल विस्तार की मांग में क्यों नहीं
- लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए आज भी तरस रहे जिलावासी
- जिले में सुसज्जित स्टेशन के साथ एक्सप्रेस ट्रेनों का अभाव
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के नाम परिवर्तन को लेकर हाल ही में जिस तरह का व्यापक और संगठित विरोध सड़कों पर देखने को मिला, उसने जिले की राजनीतिक चेतना को तो उजागर कर दिया है, लेकिन इसी के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या मंडला की लड़ाई और एकजुटता सिर्फ प्रतीकात्मक नामों तक सीमित रह गई है? स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि ऐसी ही ऊर्जा वर्षों से लंबित रेल सुविधाओं के लिए दिखाई जाती, तो आज जिले की तस्वीर कुछ और होती।
बताया गया कि विडंबना यह है कि मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन आज भी लंबी दूरी की नियमित एक्सप्रेस ट्रेनों से वंचित है। यात्रियों को लंबी यात्रा के लिए आज भी जबलपुर या नैनपुर जैसे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह स्थिति तब और अधिक पीड़ादायक हो जाती है जब मंडला जैसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आदिवासी बाहुल्य जिले को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
जिले के विकास की मांग
जिलेवासियों का कहना है कि प्रशासन और सरकार को जगाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। क्षेत्रवासियों ने दो प्रमुख सुझाव रखे हैं। जिसमें मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखा जाए, जिससे गोंडवाना के गौरवशाली इतिहास को सम्मान मिले। इसके साथ ही मंडला फोर्ट से गोंडवाना एक्सप्रेस जैसी स्थायी और प्रतीकात्मक ट्रेन सेवा शुरू की जाए, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और पहचान दोनों मजबूत हों।
विकास के असल सवालों पर जवाब चाहती है जनता
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि रेल नेटवर्क के विस्तार की फाइलें वर्षों से दफ्तरों में घूम रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। अब जनता के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या जिले की राजनीति केवल भावनात्मक मुद्दों तक सिमटी रहेगी? अब समय आ गया है कि सरकार और जनप्रतिनिधि केवल नामों पर नहीं, बल्कि मंडला की बुनियादी जरूरतों रेल, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी ठोस जवाब दें। जनता चाहती है कि विकास के इन असल मुद्दों पर भी वैसी ही एकजुटता दिखाई जाए जैसी हालिया विरोध प्रदर्शनों में देखी गई थी।
इनका कहना है
बिलासपुर मंडला जबलपुर और पेंड्रा अमरकंटक डिंडौरी मंडला घंसौर लखनादौन गोटेगांव नरसिंहपुर नई रेल लाइन को प्राथमिकता के साथ बजट में शामिल किया जाए।
चंद्रमोहन सराफ, रेल्वे संघर्ष समिति मंडला
रेलवे सरकार ने देशभर में 5 वर्षों के भीतर टर्मिनल स्टेशनों के विस्तार और विकास का लक्ष्य तय किया है। यदि मंडला फोर्ट को टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित कर, वहांं कोचिंग डिपो का निर्माण किया जाता है, नई ट्रेनों की शुरुआत, समयपालन, कोच मेंटेनेंस और यात्री सुविधाएं अपने-आप मिलेंगी।
नितिन सोलंकी, आम नागरिक मंडला
मंडला फोर्ट में कैंटीन की सुविधा जल्द से जल्द हो, इसके साथ ही एक यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से मंडला रेल्वे स्टेशन में पुलिस चौकी का निर्माण किया जाना चाहिए जिससे रात्रि में असामाजिक तत्व न रहे और यात्री सुरक्षित रहे।
राम गोपाल यादव, व्यापारी
मंडला फोर्ट रेल्वे स्टेशन सुसज्जित तो हो गया है मगर अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है । रेल्वे प्रशासन स्टेशन में मूलभूत सुविधाओं में जल्द सुधार करे।
मुकेश कछवाहा, आम नागरिक
मंडला जिले की कनेक्टिविटी दूसरे जिले प्रदेशों से होना चाहिए, खासतौर से बिलासपुर मंडला जबलपुर, गौरेला पेंड्रा, शहडोल, डिंडोरी, मंडला, गोटेगांव ये सीधी ट्रेन चालू होना चाहिए।
राजा यादव, जिला युवा अध्यक्ष
यादव समाज मंडला
मंडला फोर्ट में नवीन रेलमार्ग लंबी दूरी की ट्रेन चलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, चिकित्सा सेवाओं का फायदा होगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए राजनीति भूलकर सभी को एकजुट होना पड़ेगा।
अखिलेश सोनी, समाजसेवी










