हाई रिस्क प्रेगनेंसी में महिलाओं को रहता खतरा, रखे विशेष ध्यान

हाई रिस्क प्रेगनेंसी में महिलाओं को रहता खतरा, रखे विशेष ध्यान

  • जच्चा बच्चा की सुरक्षा के लिए प्रसव पूर्व जांच जरूरी
  • जिले के हर सीएचसी में मनाया जा रहा मातृत्व दिवस

मंडला महावीर न्यूज 29. स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रति माह दो दिवस प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के अंतर्गत गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच की जा रही है, जिससे जच्चा, बच्चा स्वस्थ रहे। मातृत्व दिवस शिविर में गर्भवती महिलाओं का एचआईवी, हिमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, यूरीन प्रोटीन, यूरिन क्लॉक एवं एल्बुमिन की जांच की गई। बताया गया कि तय तिथि 25 दिसंबर को अवकाश के कारण इस माह यह शिविर 26 दिसंबर को आयोजित किया गया।जानकारी अनुसार आयोजित मातृत्व दिवस शिविर में गर्भवती महिलाओं की प्रसव के पहले ही जांच के दौरान उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान हो जाती है। यदि ऐसी कोई गर्भवती महिला चिन्हित होती है तो ऐसी गर्भवती का प्रसवकाल में विशेष ध्यान रखा जाता है। सीएमएचओ डॉ. डीजे मोहंती ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस के तहत हर महीने की 09 व 25 तारीख को जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया जा रहा है। अवकाश तय तिथि में अवकाश होने पर आगामी कार्य दिवस में शिविर का आयोजन किया जाता है। बताया गया कि गर्भवती महिलाओं की जांच के बाद अगर किसी भी महिलाओं में एंबनॉर्मल भू्रण या गर्भाशय में किसी प्रकार की शिकायत रहने पर उसे पहले अच्छे स्वास्थ्य सेवा के लिए बेहतर अस्पताल भेजा जाता है, जिससे प्रसव के समय महिलाओं को कोई परेशानी ना हो। मातृत्व दिवस अभियान के अंतर्गत सभी सुविधाएं सरकार द्वारा नि:शुल्क दी जा रही है।

गर्भवती महिलाओं का किया ओजीटीटी 

नर्सिंग ऑफीसर प्रतिभा हरदहा ने बताया कि मातृत्व दिवस में गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज की जांच भी प्रमुखता से की जा रही है। यह ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट यानी ग्लूकोज सहनशीलता परीक्षण है। यह एक लैब टेस्ट है। इस टेस्ट से पता चलता है कि शरीर बड़ी मात्रा में चीनी को कितनी अच्छी तरह से संसाधित कर सकता है। यह टेस्ट अक्सर मधुमेह के निदान के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के लिए गर्भवती महिला को ग्लूकोज वाला पानी पिलाया जाता है। जिसके करीब दो घंटे बाद रक्त का नमूना लेकर शरीर में शर्करा के स्तर की जांच की जाती है। गर्भवती महिला को दिया जाना वाला ग्लूकोज का शरबत बनाने के लिए 300 एमएल पानी में 75 ग्राम ग्लूकोज मिलाकर बनाया जाता है, जिसे टॉलरेंस टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है।



 

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