76 प्रतिभागियों ने सीखा रिज टू वैली वॉटरशेड अप्रोच और जीआईएस तकनीक

स्थानीय विकास योजनाओं को सशक्त बनाने की पहल

  • मंडला में जीआईएस आधारित आईएनआरएम प्लानिंग पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
  • जीपीडीपी को मिला वैज्ञानिक आधार
  • 76 प्रतिभागियों ने सीखा रिज टू वैली वॉटरशेड अप्रोच और जीआईएस तकनीक

मंडला महावीर न्यूज 29. ग्राम पंचायत विकास योजना को अधिक प्रभावी, यथार्थ परक और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से प्रदान संस्था द्वारा मंडला जिले में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण जिले के सभी ब्लॉकों की चयनित ग्राम पंचायतों में कार्यरत ब्लॉक समन्वयक, क्लस्टर समन्वयक, सीएसपी एवं मास्टर ट्रेनरों के लिए आयोजित किया गया, जिसका मुख्य फोकस जीआईएस आधारित एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्लानिंग पर रहा।बताया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो मुख्य चरणों में संचालित किया गया। प्रथम चरण में प्रतिभागियों को जीपीडीपी की मूल अवधारणा, प्रक्रिया और उसके महत्व पर विस्तृत सैद्धांतिक जानकारी दी गई। द्वितीय चरण पूरी तरह से प्रायोगिक था, जिसमें प्रतिभागियों को जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित आईएनआरएम प्लानिंग के तकनीकी पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण दिया गया।प्रशिक्षण के दौरान आईएनआरएम के सिद्धांतों और उनके ग्राम विकास योजना में व्यावहारिक उपयोग पर विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों को आगामी वर्ष की कार्ययोजना में इन सिद्धांतों को प्राथमिकता से शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे ग्राम पंचायतों की योजनाएँ उनकी वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित बन सकें।इस दो दिवसीय आयोजन में जिले की चयनित ग्राम पंचायतों से 76 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रदान संस्था की टीम से अभिलाष, श्रद्धा, श्रुति, मेघा ने उपस्थित रहकर प्रतिभागियों को तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को जीपीडीपी निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिली है।बताया गया कि वर्तमान में शासन एवं जिला प्रशासन का विशेष रुझान भी जीपीडीपी को लेकर देखा जा रहा है, जिससे पंचायतें अपने संसाधनों के संरक्षण और उपयोग की दिशा में वॉटरशेड अप्रोच और आईएनआरएम आधारित वैज्ञानिक योजना पद्धति को अपनाएं। आयोजित प्रशिक्षण में प्रतिभागियों में न केवल योजना निर्माण की समझ विकसित हुई, बल्कि उन्होंने यह भी जाना कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ग्राम पंचायतों की योजनाएं कैसे अधिक सशक्त, सहभागी और स्थायी बन सकती हैं।

इनका कहना है

वॉटरशेड अप्रोच यानी रिज टू वैली प्लानिंग आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। जब हम ऊंचाई वाले क्षेत्रों से लेकर निचले हिस्सों तक प्राकृतिक संसाधनों का समग्र प्रबंधन करते हैं, तब ही जल, जमीन और वन की वास्तविक सुरक्षा संभव होती है। इस प्रक्रिया को अगर हम आजीविका से जोड़ दें, तो यह केवल संसाधन संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगा। स्थायी आजीविका और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन यही सतत् ग्राम विकास की दिशा में असली आधारशिला है।


अनुरुद्ध कुमार शास्त्री, प्रदान संस्था

ग्राम पंचायत विकास योजना तभी सफल हो सकती है जब उसमें प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन और समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं का समावेश किया जाए। जीआईएस आधारित आईएनआरएम प्लानिंग से हमें न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग समझ में आता है, बल्कि इससे विकास योजनाएँ अधिक टिकाऊ और परिणामोन्मुख बनती हैं।


सुलेख पटैल, प्रदान संस्था

ग्राम पंचायत विकास योजना केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का जीवंत खाका है। यदि इसे सही तरीके से तैयार किया जाए, तो यह ग्राम स्तर पर संसाधनों के बेहतर उपयोग, आजीविका सशक्तिकरण और सतत विकास की दिशा में ठोस परिवर्तन ला सकता हैं।


वैभव गणेश सोनोने, प्रदान संस्था


 


 

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