एंबुलेंस न मिलने और खराब रास्ता ने ली जच्चा-बच्चा की जान

एंबुलेंस न मिलने और खराब रास्तों ने ली जच्चा-बच्चा की जान

मंडला में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

  • बीजाडांडी में सिकल सेल पीडि़त गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत
  • सिस्टम की लापरवाही, 108 एंबुलेंस ने किया था इनकार
  • निजी वाहन से अस्पताल पहुंचते तक सिकलसेल पीडि़त गर्भवती और जुड़वा बच्चों की मौत

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और बदहाल रास्तों के कारण एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत हो गई। विकासखंड बीजाडांडी के ग्राम सलैया निवासी 28 वर्षीय रुक्मणी नरेती को डिलीवरी के लिए पीड़ा होने पर उनके परिजनों ने जननी एंबुलेंस को फोन किया था, लेकिन एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। मृतिका के पति प्रीतम नरेती ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं और रुक्मणी को शाम करीब 4 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उन्होंने मदद के लिए 108 जननी एम्बुलेंस को सूचना दी। 108 के ऑपरेटर ने उन्हें जवाब दिया कि उनके पास अभी कोई गाड़ी उपलब्ध नहीं है, इसलिए वे अपने किसी निजी साधन से मरीज को ले जाएं। इसके बाद परिवार ने गांव से ही एक गाड़ी बुलवाई। मृतिका के पति प्रीतम नरेती ने बताया कि सड़क का रास्ता बहुत खराब था, जिसके कारण चालक को बहुत धीरे-धीरे गाड़ी लानी पड़ी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद महिला को मृत घोषित कर दिया। प्रीतम का आरोप है कि 108 एंबुलेंस की कमी और समय पर एम्बुलेंस न मिल पाने की वजह से यह घटना घटी।शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीजाडांडी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अक्षय हरदाह ने बताया कि यह महिला पहले से ही सिकल सेल बीमारी से पीडि़त थी। महिला के पति और परिवार के सदस्य उसे शाम 5.10 बजे अस्पताल लेकर आए थे। जांच के बाद शाम 5.25 बजे महिला को मृत घोषित कर दिया गया और इसकी सूचना स्थानीय थाने को दे दी गई है।

गर्भ में थे जुड़वा बच्चे 

डॉ. हरदाह ने बताया कि महिला नियमित रूप से चेकअप के लिए अस्पताल आती थी, जिसे समय-समय पर जिला अस्पताल मंडला और मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर भी किया गया था। सोनोग्राफी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। अस्पताल में जांच के दौरान बच्चों की भी जांच की गई, लेकिन उनमें सांस या हृदय की कोई गति नहीं थी, जिसके कारण गर्भ में ही दोनों बच्चों की भी मृत्यु हो गई।

इनका कहना है

108 एंबुलेंस का संचालन और आवंटन सीधे भोपाल से होता है। 108 पर कॉल करने के बाद एंबुलेंस भेजने की प्रक्रिया में स्थानीय अस्पताल का कोई योगदान या नियंत्रण नहीं होता है।
डॉ. अक्षय हरदाह, चिकित्सा अधिकारी, बीजाडांडी


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