शुभ योग में महिलाएं रखेंगी करवा चौथ में निर्जला व्रत
- सुख, समृद्धि और पति की लंबी आयु की करेंगी कामना
- महिलाएं कर रही खरीददारी, बाजार में आई रौनक
मंडला महावीर न्यूज 29. सुहागिनों के अखंड सौभाग्य का महापर्व करवा चौथ इस साल 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष यह व्रत अत्यंत शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। जिससे इस कठिन निर्जला व्रत का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाएगा। इस दिन सिद्धि योग के साथ शिववास योग और चंद्रमा का अपनी उच्च राशि वृषभ में होने से एक दुर्लभ महासंयोग बना रहा है। पंडित नीलू महाराज ने बताया कि ऐसे शुभ योगों में व्रत रखने से न सिर्फ पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अटूट प्रेम भी बना रहता है। बताया गया कि इस निर्जला करवा चौथ व्रत से पहले मंडला के बाजारों में खासी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा सामग्री, कपड़े और श्रृंगार के सामान के साथ गोल्ड, सिल्वर ज्वेलरी की खरीदारी जोर-शोर से की जा रही है।
जानकारी अनुसार महिलाओं का सबसे प्रिय त्यौहार करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 10 अक्टूबर को करवा चौथ पर दो शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों की विशेष स्थिति बनने से इस दिन किए गए व्रत और पूजा-पाठ का कई गुना शुभ फल मिलेगा। करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और शाम को चांद निकलने तक रखा जाता है। शाम को चंद्रमा का दर्शन कर के अध्र्य देने के बाद पति के हाथ से पानी पीकर महिलाएं व्रत खोलती हैं।
पंडित नीलू महाराज ने बताया कि इस वर्ष दो शुभ योग बन रहे है। जिसका शुभ लाभ महिलाओं को मिलेगा। चांद निकलने का समय रात्रि 09.20 मिनट में रहेगा। यह योग महिलाओं के लिए लाभकारी वा मंगलदायक रहेगा। करवा चौथ के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है। यह व्रत सुख समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए होता है। महिलाएं रात को चंद्रमा की पूजा दर्शन के बाद और पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलती है।
बताया गया कि इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के अलावा वो कन्याएं भी रख सकती हैं, जिनका विवाह तय हो चुका है। लेकिन कुंवारी कन्याओं को चंद्र दर्शन नहीं करने चाहिए। ज्योतिष में चांद प्रेम और प्रसिद्धि का प्रतीक है। यही वजह है कि सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करती हैं, जिससे उनके आशीर्वाद से सारे गुण उनके पति के अन्दर आ जाए। जो महिलाएं बीमारी या किसी अन्य कारण से करवा चौथ का व्रत न कर पाए, उनके पति को यह व्रत करना चाहिए।
मंडला में चंद्रोदय और शुभ मुहूर्त
पंडित नीलू महाराज ने बताया कि करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय चंद्रमा का उदय होता है। पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात 10.54 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर की शाम 7.38 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण व्रत 10 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। मंडला में चंद्रोदय का समय रात 9.20 बजे का है। महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद अद्र्ध देकर अपने पति के हाथों जल ग्रहण करेंगी और उपवास का परायण करेंगी। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक अन्न और जल का त्याग कर निर्जला व्रत रखती हैं।
बाजार में रौनक
सोने के बढ़ते दामों के बावजूद मंडला सराफा बाजार में करवा चौथ की रौनक बरकरार रही। ज्वैलर्स ने ग्राहकों की मांग को देखते हुए लाइट वेट ज्वेलरी पर खास ध्यान दिया है। स्थानीय ज्वेलर्स की दुकानों में स्टाईलिस्ट ज्वेलरी ज्यादा पंसद कर रही है। जिसमें सोने, चांदी के ज्वेलरी महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं।
पति के प्रति समर्पण का पर्व है करवा चौथ
करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति के उस पवित्र बंधन का प्रतीक है जो पति-पत्नी के बीच होता है। भारतीय संस्कृति में पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गई है। करवा चौथ का व्रत रख पत्नी अपने पति के प्रति यही भाव प्रदर्शित करती है। स्त्रियां श्रृंगार करके ईश्वर के समक्ष दिनभर के व्रत के बाद यह प्रण भी लेती हैं कि वे मन, वचन एवं कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी।
इनका कहना है
प्रतिवर्ष करवा चौथ का व्रत रहते है। इसको लेकर मन में काफी उत्साह रहता है। करवा चौथ की तैयारियां कर ली है। ससुराल और मायके से तो तौहफा मिलेगा ही, अपने हिसाब से भी अपने लिये खरीददारी कर रहे है। ऐसे तो प्रति पल अपने सुहाग की सलामती की कामना करती हूं लेकिन करवा चौथ के दिन विधि-विधान पूर्वक व्रत करके पति से आशीर्वाद लेने के बाद व्रत पूरी करूंगी।
यह मेरा दूसरा करवा चौथ व्रत है, पहले व्रत में जो उत्साह था वही उत्साह दूसरे करवा चौथ को लेकर भी है। समय के साथ परंपराएं कहीं न कहीं और मजबूत हुई है। त्यौहार ग्लोबल हुए हैं। पहले यह पर्व कुछ खास वर्ग तक ही सीमित था। अब हर ओर त्यौहार की खुशियां देखने को मिलता है। करवा चौथ भारतीय संस्कृति में पति के लिए पत्नी के समर्पण भाव को दर्शाता है। इस व्रत को लेकर हम काफी उत्साहित रहते है।
सुहागिनें अपने पति के लंबे उम्र की कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखती हैं, वहीं युवतियां भी योग्य वर की कामना के साथ निर्जला उपवास करती हैं। दशहरे के बाद अब करवा चौथ को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहता है। कपड़े, फैंसी आईटम के लिये बाजार में रौनक रहती है। इसके बाद धनतेरस और दीवाली का माहौल बन जाएगा। करवा चौथ की तैयारी कर ली गई है।
प्रतिवर्ष मैं करवा चौथ का व्रत रखती हूं। इस व्रत को लेकर उत्साह भी रहता है, जिसे हम खूब इंज्वाए करते है। पूरा परिवार जब साथ होता है तो त्यौहार की खुशियां चार गुना हो जाती है। करवा चौथ व्रत के आयोजन में आसपास की महिलाएं एक साथ एकत्र होकर कवर चौथ का पूजन करेगी और चंद्रमा के दर्शन के बाद अद्र्ध देकर अपने पति के हाथों जल ग्रहण करेंगी। सामूहिक आयोजन बहुत ही भव्यता से मनाया जाता है।
साल में एक बार आने वाले करवा चौथ को लेकर मन में काफी उत्साह रहता है, सजने, संवरने का मौका एक बार फिर मिलता है। व्रत को लेकर पूरी तैयारियां कर ली है, फिर भी कही कोई कमी ना रह जाए इसकी भी चिंता रहती है। हालांकि बचपन से ही मां को पूजा करते देखती आई हूं। मेरे लिए यह सिर्फ एक व्रत नहीं बल्कि खास दिन है। इस दिन को बेहतरीन तरीके से सेलिब्रेट करूंगी। व्रत के लिए अभी और खरीददारी करेंगे।
















