लोन के नाम पर आदिवासी महिलाओं से लाखों की ठगी, सांसद के गृह ग्राम का मामला
- भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन के कर्मचारी पर आरोप
- निवास थाने में शिकायत दर्ज
- बिना लोन दिए ही शुरू हुई वसूली
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के निवास क्षेत्र में एक बार फिर आदिवासी और अशिक्षित महिलाओं से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस बार ठगी का शिकार हुई महिलाएं मंडला सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते के गृह ग्राम खिन्हा की हैं। यहां भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन की नारायणगंज स्थित शाखा के दो कर्मचारियों ने कथित तौर पर एक दर्जन से अधिक महिलाओं से 4.81 लाख रुपए का गबन किया है। पीडि़त महिलाओं ने मंगलवार को निवास थाने में शिकायत दर्ज कराई और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। महिलाओं ने बताया कि भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन में काम करने वाली मनीषा परस्ते और बैंक मैनेजर राजेश कुशरे ने उन्हें समूह बनाने और जरूरी कार्यवाही के नाम पर कम्प्यूटर, डिवाइस और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए।
महिलाओं का आरोप है कि उन्हें किसी भी तरह का कोई लोन नहीं दिया गया। लेकिन कुछ महीनों बाद मैनेजर राजेश कुशरे साप्ताहिक तौर पर उनसे लोन की किस्त वसूलने आने लगे। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया और कहा कि उन्होंने कोई लोन नहीं लिया है, तो मैनेजर ने उन्हें जेल भेजने की धमकी दी। जब पीडि़त महिलाओं ने इस मामले की जानकारी जुटाई, तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर लाखों का लोन निकाला जा चुका है।
बताया गया कि पार्वती बाई के नाम पर 1 लाख, फूला बाई के नाम पर 50 हजार, लक्ष्मी बाई के नाम पर 75 हजार, गया बाई के नाम पर 60 हजार, पतिया बाई के नाम पर 15 हजार, गीता बाई के नाम पर 68 हजार, लाडली बाई के नाम पर 32 हजार, लक्ष्मी यादव के नाम पर 15 हजार और ममता यूईके के नाम पर 50 हजार का लोन निकाल लिया गया था। कुल मिलाकर यह राशि 4.81 लाख थी। महिलाओं ने बताया कि लोन की यह पूरी राशि उनके फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर बैंक से निकाल ली गई और मैनेजर राजेश कुशरे व मनीषा परस्ते ने रख ली। अब उन पर वसूली के लिए दबाव बनाया जा रहा है। घटना के बाद से मनीषा परस्ते फरार है।
महिलाओं के गहने हड़पे
धोखाधड़ी का यह मामला यहीं खत्म नहीं होता। पीडि़त महिलाओं में से गीता बाई से एक जोड़ी चांदी का गजरा, एक जोड़ी पायल और एक सोने का मंगलसूत्र भी लिया गया था। इसी तरह सीमा और कमला से चांदी का करधन लिया गया था। इन गहनों को कुछ दिनों में वापस करने का वादा किया गया था, लेकिन अब मनीषा परस्ते गांव से फरार है। इस घटना से यह साफ है कि आदिवासी क्षेत्रों में समूह बनाकर लोन देने के नाम पर धोखाधड़ी का यह गोरखधंधा तेजी से फल-फूल रहा है।
इनका कहना हैं
मैंने नहीं किया है, जो भी फर्जीवाड़ा हुआ हैं मनीषा परस्ते द्वारा किया गया हैं, मेरे इसमें कोई रोल नहीं हैं।
राजेश कुशरे, प्रबंधक भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन, शाखा नारायणगंज
मंगलवार को कुछ महिलाओं ने थाने में आकर एक आवेदन दिया हैं, गबन और ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई हैं जांच कर कार्यवाही की जावेगी।
वर्षा पटेल थाना प्रभारी निवास
रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे











