नाबालिगों की बेलगाम रफ्तार बनी खतरा, यातायात नियमों की अनदेखी पर प्रशासन मौन
- बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं, शहर में कार्रवाई शून्य
मंडला महावीर न्यूज 29. शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खासतौर पर नाबालिगों द्वारा बगैर लाइसेंस बाइक चलाना आम हो गया है। तेज रफ्तार, पटाखा जैसी आवाज निकालते बुलेट, सायरन बजाते फोर व्हीलर और सड़कों पर स्टंट करते नाबालिगों की यह आदत अब आम लोगों के लिए खतरा बन गई है। स्थिति यह हो गई है कि रोकने पर ये किशोर अभद्र भाषा का प्रयोग करने से भी नहीं चूकते। वर्तमान में प्रशासन व पुलिस द्वारा हेलमेट के बिना पेट्रोल नहीं देने जैसे निर्देशों का पालन कराये जाने की चर्चा हो रही है, जो सराहनीय है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना लाइसेंस वाहन चला रहे नाबालिगों पर भी सख्ती से कार्रवाई की जाए।
सूत्रों के अनुसार कई बार इस विषय पर समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुई हैं, जनप्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों ने आवाज भी उठाई है, लेकिन यातायात विभाग अमला बल की कमी का हवाला देकर कार्रवाई से बचता रहा है। जबकि हाईवे पर ट्रक और छोटे वाहनों को नियमित रूप से रोका जाता है, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि शहरी क्षेत्रों में नाबालिगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? अभी हाल ही में जिला मुख्यालय के पास हुई एक सड़क दुर्घटना में एक परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार बाइक और लापरवाही भरा ट्राला वाहन संचालन था। ऐसी घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं, जो समाज के लिए चिंताजनक है।
नियम तो हैं, पर पालन कौन कराए
सरकार ने बाइक में पटाखा साइलेंसर, सायरन, और हूटर जैसे अवैध उपकरणों पर रोक लगा रखी है। मगर हकीकत में इन नियमों का पालन कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। हर तीसरी-चौथी गाड़ी में ये अवैध उपकरण लगे हुए हैं, जिनसे ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है और आम नागरिक परेशान हैं। संबंधित अधिकारी सब जानते हुए भी अनजान बने हुए है। जिससे आमजनों की परेशानी बढ़ गई है।
जनहित में ठोस कार्रवाई की मांग
यातायात को सुचारू रूप से चलाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है। इन नियमों को लागू करने, चालान काटने और वाहनों को जब्त करने का अधिकार भी उन्हीं के पास है। लेकिन शहर में ऐसी कार्रवाई लगभग शून्य है। अब केवल जागरूकता से काम नहीं चलेगा, बल्कि कठोर और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है, जिससे सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके और भविष्य में होने वाले हादसों को रोका जा सके।
भारतीय मोटर वाहन अधिनियम का प्रावधान
भारतीय मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी नहीं चला सकता। यदि कोई नाबालिग ऐसा करते पकड़ा जाता है, तो वाहन मालिक, अभिभावक पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना और 3 साल की जेल हो सकती है। इसके साथ ही नाबालिग को 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद भी 1 साल तक लाइसेंस नहीं मिल पाता। इसके अलावा सायरन और हूटर का इस्तेमाल केवल आपातकालीन वाहन एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन और पुलिस वाहन के लिए ही होता है। इसका उल्लंघन करने पर एक हजार से 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।











