भाजपा सरकार का ओबीसी विरोधी चेहरा फिर बेनकाब–विभा पटेल

भाजपा सरकार का ओबीसी विरोधी चेहरा फिर बेनकाब–विभा पटेल

  • सुप्रीम कोर्ट में तथ्य रखने से भागी मोहन यादव सरकार, लाखों ओबीसी युवाओं का भविष्य बर्बाद
  • भाजपा का दोहरा चरित्र – आरक्षण का नाम लेकर वोट, सत्ता में आते ही धोखा”
  • 27% ओबीसी आरक्षण से भाजपा की नफ़रत – अदालत में सच का सामना करने से भी भागी”

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर श्रीमती विभा पटेल ने भाजपा सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि “मोहन यादव सरकार एक बार फिर ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भाग खड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भाजपा सरकार ने अपना पक्ष रखने के बजाय बेशर्मी से समय मांग लिया। यह साबित करता है कि भाजपा की नीयत ओबीसी वर्ग के खिलाफ है और वह आरक्षण विरोधी मानसिकता से बाहर नहीं आना चाहती।”

श्रीमती विभा पटेल ने स्मरण कराते हुए कहा कि 8 मार्च 2019 को मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) अध्यादेश, 2019 जारी किया गया, जिसने ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया। 9 मार्च 2019 को तत्कालीन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अध्यादेश को मंजूरी दी, जिससे ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27% करने का कानून लागू हुआ। इसके उपरांत 14 अगस्त 2019 को मध्यप्रदेश विधानसभा ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2019 को पारित किया था। इस विधेयक के तहत ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया गया, जो 8 मार्च 2019 को जारी अध्यादेश को स्थायी कानून में बदलने के लिए था। उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का यह कानून सभी तरह की प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं को पूर्ण कर लागू किया गया था। लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही अध्यादेश को खत्म कर दिया। अगर इसे खत्म नहीं किया जाता तो ओबीसी को लाभ मिलता। लेकिन शिवराज सिंह चौहान से लेकर मोहन यादव तक भाजपा की हर सरकार ने सिर्फ छलावा किया। लाखों ओबीसी युवाओं को उनका हक देने के बजाय भाजपा सरकार लगातार कोर्ट का बहाना बनाकर उनके सपनों को रौंद रही है।”

श्रीमती विभा पटेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी, एडवोकेट वरुण ठाकुर, ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एवं एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाहा और एडवोकेट रामकरण प्रजापति ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि छत्तीसगढ़ की तरह मध्य प्रदेश में भी 27% आरक्षण तुरंत लागू होना चाहिए। “लेकिन भाजपा सरकार ने 2022 में एडवोकेट जनरल की सलाह पर इसे रोक दिया, जिसके कारण चयनित अभ्यर्थियों का रिज़ल्ट आज तक होल्ड पड़ा है। यह भाजपा की ओबीसी विरोधी साजिश का साफ सबूत है।”

श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक भाजपा सरकार का रवैया बेहद शर्मनाक रहा। “कोर्ट ने साफ पूछा कि जब कानून में कोई रोक नहीं है तो आप 27% आरक्षण क्यों नहीं दे रहे हैं? भाजपा सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं था। यह दिखाता है कि भाजपा ओबीसी के संवैधानिक अधिकार छीनने पर तुली हुई है।” सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 12 अगस्त को तय की है।

श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि प्रदेश में लाखों सरकारी पद खाली हैं लेकिन भाजपा सरकार न तो आरक्षण लागू कर रही है और न ही नई भर्तियां कर रही है। “मोहन यादव सरकार अगर सच में ओबीसी समर्थक है तो तत्काल आदेश जारी करे, 13% आरक्षण वाले पदों को अनहोल्ड करे और इसे राजपत्र में प्रकाशित करे।”

श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि ओबीसी चाहता हैं कि -सभी सरकारी भर्तियों में 27% ओबीसी आरक्षण का पूरा लाभ मिले और होल्ड किए गए 13% पद तुरंत जारी हों और योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक दिया जाए। उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार ओबीसी युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। प्रदेश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और आने वाले समय में भाजपा को इसका करारा राजनीतिक जवाब मिलेगा।”


 

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