15 करोड़ मत्स्य उत्पादन लक्ष्य में 7 करोड़ 18 लाख उत्पादन

15 करोड़ मत्स्य उत्पादन लक्ष्य में 7 करोड़ 18 लाख उत्पादन

  • तीन प्रक्षेत्र में तैयार हुए स्पॉन, विभागीय तालाब में किये वितरित
  • कम तापमान और अच्छी बारिश से मत्स्य उत्पादन का होगा लक्ष्य पूरा

मंडला महावीर न्यूज 29.  अगस्त माह के दो दिन बीत गए है, इस बीच तापमान में उतार चढ़ाव भी रहा। जिसके कारण मत्स्य उत्पादन प्रभावित हुआ। इस सीजन में मौसम का मिजाज कुछ अलग ही अंदाज में रहा, जहां बारिश की शुरूआत मूसलाधार के साथ हुई, वहीं इसके बाद तापमान में अचानक बदलाव भी देखा गया। जिसके कारण कुछ दिन मौसम में उमस बढ़ गई और कृषि के साथ इससे जुड़ी अन्य विभागों की योजनाएं भी प्रभावित हुई। खास तौर पर तालाब एवं जलाशयों में मत्स्य विकास की योजना बारिश लेट होने के कारण प्रभावित है। जून के बाद से ही मत्स्य योजना बारिश के साथ रफ्तार पकड़ती है लेकिन जुलाई के प्रथम पखवाड़े में मूसलाधार बारिश हुई लेकिन बारिश थम गई और तापमान भी 30 डिग्री के ऊपर पहुंच गया। जिसके कारण मत्स्य विभाग को मिला लक्ष्य पूरा करने में अब मशक्कत करनी पड़ रही है। लक्ष्य के हिसाब से उत्पादन अभी आधा ही हो पाया है। तापमान में उतार चढ़ाव के कारण बीज उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बनी है। मत्स्य विभाग के अनुसार इस वर्ष विभाग को 15 करोड़ मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य मिला है। विभाग का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब अच्छी बारिश के साथ तापमान भी साथ देगा।

जानकारी अनुसार मछली पालन विभाग द्वारा मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिये बीज उत्पादन किया जा रहा है। मछली पालन प्रक्षेत्र में स्पॉन तैयार किये जा रहे है। जिसके बाद मछुआरों, निजी मत्स्य पालकों और किसानों को मछली बीज दिया जाएगा। जिले में इस बार 15 करोड़ मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल विभाग तीन प्रक्षेत्र में 09 सेट लगा चुकी है, जबकि मछली बीज उत्पादन के लिए इससे ज्यादा सेट लगाना था, लेकिन बारिश के साथ तापमान भी विभाग को साथ नहीं दे पा रहा है। इस वर्ष जिले के तीनों प्रक्षेत्र से 07 करोड़ 18 लाख स्पॉन उत्पादन तैयार किया गया है। वहीं कटरा प्रक्षेत्र में तीन सेट तैयार कर विभागीय तालाबों को दिए गए है और चौथा सेट इस सप्ताह ही लगाया गया है।

बताया गया कि मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए शासन कम दर पर मछली बीज हितग्राहियों को उपलब्ध कराता है। मांग के आधार पर शासन जिले का टारगेट निर्धारित करता है। मंडला में इस वर्ष 15 करोड़ मछली बीज उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। जिसमें मंडला में 7 करोड़, निवास में 7 करोड़ और बंजी में 1 करोड़ 50 लाख स्पान तैयार किया जाएगा। जिसमें कटरा मछली पालन प्रक्षेत्र में चार सेट, बंजी में दो सेट और निवास प्रक्षेत्र में तीन सेट लगाकर स्पॉन तैयार किये गए है। तीनों प्रक्षेत्र मिलाकर करीब 07 करोड़ 18 लाख बीज तैयार किए गए है।

न्यूनतम तापमान 30 डिग्री जरूरी 

प्रभारी सहायक संचालक मत्स्य विभाग के हेंमत भगत ने बताया कि इस बार तापमान में उतार चढ़ाव जारी है, जिसके कारण विभाग को मिले लक्ष्य को पूरा करने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कटरा में चार सेट लगाकर करीब दो करोड़ 50 हजार बीज तैयार किए गए है। इसमें भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तापमान बढऩे के कारण तीन सेट में एक सेट खराब हो गया। फिलहाल निवास और बंजी में भी स्पान तैयार किये जा रहे है। क्योंकि स्पान तैयार करने के लिए न्यूनतम तापमान लगभग 28 से 30 डिग्री का तापमान होना जरूरी है।

07 करोड़ 18 लाख तैयार किए स्पॉन 

मत्स्य विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार मानसून में देरी और तापमान में उतार चढ़ाव के चलते तीन प्रक्षेत्र में फिलहाल लक्ष्य का आधा ही उत्पादन हुआ है। तीनों प्रक्षेत्र में 07 करोड़ 18 लाख मछली बीज तैयार हुए है। स्पॉन तैयार करने के लिए तीनों प्रक्षेत्र के बंगलाबंध में मछलियों का प्रजनन कराकर अंडे इक्यूवेलेशनपूल में छोड़े गए। जिसके बाद यहां स्पॉन तैयार हुए। प्रक्षेत्र कटरा में चार सेट, बंजी में एक और निवास में तीन सेट लगाया गया है। जिसमें 07 करोड़ 18 लाख स्पॉन तैयार किए गए। यदि आगे और झमाझम बारिश होती है तो मत्स्य विभाग से हितग्राही, मछुआरे और किसान मछली बीज ले जाएंगे। इसके साथ ही मछली बीज को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को देने से पहले बीज के पैकेट में ऑक्सीजन की व्यवस्था भी की जाती है।

विभागीय तालाबों में दिए स्पॉन 

इस वर्ष मत्स्य बीज उत्पादन लेट बारिश और तापमान के के कारण विभाग अभी आधा ही लक्ष्य पूरा कर पाया है। जिले में मत्स्य बीज का उत्पादन जुलाई की शुरूआत से शुरू किया जाता है और एक पखवाड़ा खत्म होते तक किसान और मछुआरे मछली बीज ले जाना शुरू भी कर देते है। लेकिन बारिश समय से ना होने के कारण इस बार कुछ ही किसान और हितग्राही मछली बीज लेने पहुंचे। कटरा प्रक्षेत्र में 02 करोड़ 50 लाख मछली बीज उत्पादन किया गया, जिसमें 02 करोड़ 10 लाख मछली बीज विभागीय तालाब में दिए गए है और 40 लाख बीज किसानों और हितग्राहियों को दिए गए है। बताया गया कि आगामी दिनों में मत्स्य विभाग मछली बीज उत्पादन करके मत्स्य पालकों और विभागीय तालाब को देगी।

नदी में छोड़ेंगे मछलिया 

मछुआरों के अलावा नदी, नालों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिये प्रति वर्ष विभाग द्वारा मछलियां जलाशयों में छोड़ी जाती है। इस वर्ष भी विभाग को 15 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है। जिसमें विभाग लक्ष्य को पूरा करने के लिए नर्मदा नदी में स्थान चिन्हित किए है। विभाग को अब अच्छी बारिश का इंतजार है। जिससे जलाशयों, नदियों में पानी का भराव हो सके। विभाग द्वारा तैयार किये गई मछलियों को गहरे क्षेत्र में छोड़ेंगे। जिससे यहां मछलियों की संख्या बढ़ सके।

इस साल कैसे होगा लक्ष्य पूरा 

बताया गया कि पिछले साल मत्स्य विभाग को 13 करोड़ बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस वर्ष यह लक्ष्य डेढ़ करोड़ बढ़ गया है। विभाग को 14 करोड़ 50 लाख बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। विगत वर्ष तो विभाग ने लक्ष्य जैसे तैसे पूरा कर लिए थे, लेकिन इस वर्ष तो बारिश ने भी धोखा दे दिया है। अगस्त का पहला पखवाड़ा समाप्त होने को है, लेकिन वातावरण में अभी भी उमस है। वहीं विभाग को अभी और झमाझम बारिश का इंतजार है। यदि तापमान में उतार चढ़ाव रहा और झमाझम बारिश ना हुई तो इस वर्ष बीज उत्पादन प्रभावित होने का अंदेशा बना हुआ है। इस बार मत्स्य विभाग को दिया गया 14 करोड़ 50 लाख का लक्ष्य कैसे पूरा होगा।

बंजी और निवास में तैयार हो रहे स्पॉन 

मत्स्य निरीक्षक पीआर वैद्य ने बताया कि निवास मत्स्य पालन विभाग को इस बार सात करोड़ मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य मिला है। जिसमें तीन सेट लगाकर 4 करोड 28 लाख मत्स्य उत्पादन कर लिया गया है। इस मत्स्य उत्पादन में 1 करोड़ 80 लाख मत्स्य बीज को बिछिया बंजी के विभागीय तालाब में दिया गया है। वहीं 70 लाख स्पॉन थांवर नैनपुर के विभागीय तालाब, इसके साथ ही सहायक संचालक मत्स्य उद्योग जबलपुर को 40 लाख स्पॉन दिए गए है। विभागीय मत्स्य विभाग निवास को 1 करोड़ स्पॉन दिए गए है और 38 लाख स्पॉन किसान समेत अन्य को दिए गए है। बंजी के मत्स्य निरीक्षक एसके भारद्वाज ने बताया कि डेढ़ करोड़ का विभागीय लक्ष्य मिला है। दो सेट अभी तक लगाए गए है। जिसमें 40 लाख स्पॉन तैयार कर लिये गए है। आगामी दिनों में मिले लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।



 

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