बम बम भोले के जयघोष से गूंज उठा मंडला, भव्य कांवड़ यात्रा का समापन

बम बम भोले के जयघोष से गूंज उठा मंडला, भव्य कांवड़ यात्रा का समापन

  • नंदी महाराज की स्थापना
  • शहर में निकली कांवड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत
  • रात में भजन संध्या का आयोजन

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला में विगत चार वर्षों से चली आ रही शिव कांवड़ यात्रा का आयोजन इस वर्ष भी पूरी भव्यता और उत्साह के साथ किया गया। शिव कांवड़ आयोजक समिति द्वारा आयोजित इस यात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चों ने भाग लिया। कांवड़ यात्रा का शुभारंभ मुन्नीबाई धर्मशाला के सामने स्थित शिव मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ हुआ। यहां से यात्रा बलराम चौक, पड़ाव, चिलमन चौक, बस स्टैंड, ज्ञानदीप स्कूल, नगर पालिका, बड़ चौराहा, अंबेडकर चौक, उदय चौक, सराफा और बुधवारी होते हुए किला घाट स्थित व्यास नारायण मंदिर पहुंची। यहां भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने और पूजन के साथ यात्रा का समापन हुआ।

नगर के विभिन्न स्थानों पर धर्मप्रेमियों द्वारा कांवड़ यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। बुधवारी में सामाजिक कार्यकर्ता नीरज अग्रवाल और इंद्रेश बब्बल खरिया ने पुष्प वर्षा कर कांवडिय़ों का अभिनंदन किया। वहीं मंदिर प्रांगण में रात्रिकालीन भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें धर्मप्रेमियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। रविवार को प्रांगण में नंदी महाराज की स्थापना विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ की गई।

सामाजिक कार्यकर्ता किशोर रजक ने बताया कि कांवड़ यात्रा सावन के महीने में शिव भक्तों द्वारा की जाने वाली एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है, जिसमें भक्त गंगाजल या पवित्र नदी से जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कांवड़ यात्रा की पौराणिक पृष्ठभूमि भी बताई, जिसमें समुद्र मंथन से भगवान शिव द्वारा विषपान, श्रवण कुमार की तीर्थयात्रा, और भगवान परशुराम द्वारा गंगाजल से जलाभिषेक जैसी कथाएं शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि कांवडिय़े अक्सर भगवा वस्त्र पहनते हैं, उपवास रखते हैं, समूह में यात्रा करते हैं, और समाज में उन्हें भक्ति, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। यह यात्रा न केवल व्यक्तियों को आध्यात्म से जोड़ती है, बल्कि सामूहिक ऊर्जा और धार्मिक एकजुटता का भी निर्माण करती है। इस आयोजन को सफल बनाने में शिव कांवड़ आयोजक समिति के गुड्डू ठाकुर, रानू रजक, नेता नंदा, मुन्ना कोष्टा, राजू नंदा, पप्पू साहू, विश्वकर्मा जी, केसर नंदा, सविता तिवारी, अमित रजक, तुषार चौरसिया, नरेंद्र लहोरिया सहित अनेक शिवभक्त मौजूद रहे।


 

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