पडरिया पंचायत का सख्त कदम
- 12 गौवंश गौशाला भेजे, मालिकों पर लगा जुर्माना
- सड़कों पर घूमते पशुओं से निजात दिलाने की पहल
- अन्य पंचायतों के लिए बना उदाहरण
मंडला महावीर न्यूज 29. नारायणगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत पडरिया ने आवारा गौवंश की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभावशाली कार्रवाई की है। लंबे समय से सड़कों पर खुलेआम घूम रहे गौवंशों से ग्रामीणों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसे देखते हुए पंचायत ने विगत दिवस 9 जुलाई को एक सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी गौपालकों को चेतावनी दी थी कि यदि उनके पशु सड़कों पर आवारा घूमते पाए गए तो उन्हें गौशाला भेजकर जुर्माना लगाया जाएगा। बताया गया कि इस अभियान में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुप्ता की टीम, थाना टिकरिया प्रभारी गोपाल घासले, ग्राम पंचायत सचिव अभिषेक शर्मा, ग्राम प्रधान राजकुमार तेकाम, पंचायत के अन्य कर्मचारी के साथ बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। इस संयुक्त प्रयास को स्थानीय लोगों ने खूब सराहा है, क्योंकि यह प्रशासन, पंचायत और पशु विभाग के तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
जानकारी अनुसार पडरिया पंचायत द्वारा शनिवार को 12 आवारा गौवंशों को पकड़ा गया और उन्हें सिवनीमाल स्थित मुख्यमंत्री गौशाला में सुरक्षित रूप से पहुंचा दिया गया। इसके साथ ही कुछ गौवंश मालिकों पर 4 हजार 500 रूपए का जुर्माना भी लगाया गया। इन मालिकों से एक शपथ पत्र भी भराया गया है, जिसमें उन्होंने भविष्य में अपने मवेशियों को सड़कों पर न छोडऩे का वादा किया है, अन्यथा पंचायत उन्हें दोबारा गौशाला भेजने और कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
ग्रामवासियों का कहना है कि यह पहल समय की आवश्यकता थी। खुलेआम घूमते मवेशी न केवल सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे थे, बल्कि खेतों में घुसकर फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे थे। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत की थी और अब पंचायत की इस ठोस कार्रवाई से एक सकारात्मक संदेश गया है। थाना प्रभारी गोपाल घासले ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी कोई गौवंश आवारा हालत में पाया जाता है, तो संबंधित पशुपालकों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पशु चिकित्सा अधिकारी ने गौशाला में पहुंचाए गए पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की। बताया गया कि पडरिया ग्राम पंचायत की इस सक्रिय कार्यवाही ने अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिससे उम्मीद है कि अन्य क्षेत्रों में भी आवारा पशुओं की समस्या से निजात मिल सकेगी।











