शिवालयों में गूंजें बम बम भोले के जयकारे
- सावन का पहला सोमवार
- भोले को जल ढारने उमड़ा भक्तों का सैलाब
मंडला महावीर न्यूज 29. भगवान शिव के भक्तों के लिए शिवरात्रि का अपना ही खास महत्व होता है। सावन माह भगवान शिव को समर्पित होता है। भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि व खुशहाली आती है। भगवान शिव का प्रिय मास सावन शुरू हो चुका है। इस मास में आने वाला हर सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। सुबह से ही भक्त मंदिरों, नर्मदा घाट में बने शिवालयों में पहुंचे। भक्तों ने भगवान शंकर की पूजा अर्चना की और भोलेनाथ का फूलों, बेल पत्र से श्रृंगार किया। शास्त्रों के अनुसार पूरे वर्ष शिव की पूजा करने का जो पुण्य है वह सावन में आने वाले सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से प्राप्त हो जाता है। सावन के पहले सावन सोमवार पर शिवालयो में बम-बम भोले की गूंज सुनाई दी। शिवभक्त शिवभक्ति में लीन रहे।
पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष के सावन मास कुछ खास है, इस साल सावन सोमवार पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा-अर्चना के फल को और भी बढ़ा देंगे। पहले सावन सोमवार को प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सुकर्मा योग, शोभन योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग बने जो विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। इसके साथ ही इस सावन में सात सर्वार्थ सिद्धि और एक अमृत सिद्धि योग का अनुपम संयोग बन रहा है, जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम अवसर प्रदान करेगा।
बताया गया कि इस बार सावन में चार सोमवार ही होगे। इन चार सोमवार भक्त भोले की आराधना में लीन रहेगे। इसके साथ सावन माह में शक्ति पीठों, शिवालयों, मंदिरों में रामायण पाठ का भी आयोजन अनवरत चलता रहेगा। इस वर्ष सावन माह की शुरूआत के पहले दिन ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना जो शिव भक्तों के मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अच्छा है।

सावन मास के प्रथम सोमवार को लेकर भक्तो में खासा उत्साह देखने को मिल। खासकर महिलाएं सावन सोमवार का व्रत धारण करी। पहले सोमवार के लिए शिवालयो में विशेष तैयारियां पहले ही कर ली गई थी। सावन मास में विशेष रूप से भगवान शंकर भोले बाबा की पूजा, अर्चना का अपना महत्व है। दिन तिथि और चौघडिय़ा के हिसाब से रूद्राभिषेक, महाआरती का विशेष क्रम पूरे श्रावण मास के दौरान चलता रहेगा। सोमवार पर श्रद्घालुओं द्वारा बड़ी संख्या में व्रत धारण किया गया।
अखंड रामायण पाठ प्रारंभ
सोमवार को शिवालयों में भक्तगण भोलेनाथ का पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित किये। मंदिरों में सावन माह चलने वाले धार्मिक आयोजनों की शुरूआत हो गई है। इनमें सोमवार के पहले दिन से ही शहर के सारे धार्मिक स्थलों, पंडालों, मंदिरों व घरों में अखंड रामायण पाठ प्रारंभ हो गए। श्रावण मास का यह महीना परंपराओं के मुताबिक पुण्य माह माना जाता है। इसमें विशेष रूप से धार्मिक आयोजन किए जाते है।
शिवालय सजकर तैयार
बड़ी संख्या में घरों में रूद्रि निर्माण भी सोमवार से प्रारंभ हो गए। श्रद्घालुओं की अधिक संख्या की संभावना को देखते हुए मंदिरों, शिवालयों में तैयारियां की गई है। मंदिरो को आकर्षक विद्युत साजसज्जा से सजाया गया है। महिला मंडलियों द्वारा भजन-कीर्तन के आयोजन प्रारंभ कर दिए गए है। पहला सोमवार होने के चलते शहर पूरी तरह से धर्ममय बन चुका है। शहर के विभिन्न शिवालयों में भगवान शंकर का अभिषेक किया गया। लोग इस माह के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करते है। फलों के दामों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। सावन मास में शिवभक्त पूरे माह महादेव की भक्ति में लीन रहते है।
नर्मदा में लगाई डुबकी
श्रावण मास के पहले सावन सोमवार पर भक्त नर्मदा के अलग-अलग घाटो पर पहुंचकर डुबकी लगाए। इसके बाद भगवान शंकर का पूजन, अभिषेक किया। वहीं शहर में नर्मदा के लगभग हर तट पर भोलेनाथ विराजे हुए है। जहां पर भक्तों की काफी भीड़ देखी गई।
महाआरती में शामिल हुए भक्त
प्रथम सावन सोमवार के अवसर पर शाम को माहिष्मती घाट पर होने वाली महाआरती में शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्घालु शामिल हुए। पहले सावन सोमवार होने से इसका विशेष महत्व माना गया। महाआरती के लिए समिति ने विशेष इंतजाम किये गए थे।
घर-घर हुये रूद्री निर्माण
बड़ी संख्या में घरों में रूद्रि निर्माण भी सावन शुरू होते ही प्रारंभ हो गए। प्रतिवर्ष श्रद्घालुओं की अधिक संख्या की संभावना को देखते हुए मंदिरों, शिवालयों में तैयारियां की जाती थी। वहीं भक्त अपने घरों में ही रूद्री निर्माण कर पूजा अर्चन करेंगे। पहला सोमवार होने के चलते शहर पूरी तरह से धर्ममय बन चुका है। शहर के विभिन्न शिवालयों में भगवान शंकर का अभिषेक किया गया। लोग इस माह के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करते है। फलों के दामों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। सावन मास में शिवभक्त पूरे माह महादेव की भक्ति में लीन रहते है।












