ग्रामीण बोले सरकार स्वास्थ्य से कर रही खिलवाड़
- जागरूकता की कमी से पोषण योजना को झटका
- ग्रामीण कर रहे पौष्टिक चावल का बहिष्कार
- प्लास्टिक चावल के भ्रम में नारायणगंज के ग्राम पोतला के ग्रामीण
मंडला महावीर न्यूज 29. नारायणगंज विकासखंड अंतर्गत ग्राम पोतला के ग्रामीणों को सरकारी राशन दुकान से प्लास्टिक के चावल मिलने की शिकायत सामने आई है। गुणवत्ताविहीन चावल मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और उन्होंने इस संबंध में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें वितरण किए जा रहे चावल गुणवत्ताहीन हैं और प्लास्टिक के होने के कारण उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि राशन दुकान में मिलने वाला चावल प्लास्टिक का नहीं बल्कि फोर्टीफाइड चावल है, जो पोषण युक्त चावल है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के चलते ग्रामीणों को राशन दुकान से मिलने वाले चावल में मिलावट की बात कर रहे है। जिससे स्थानीय प्रशासन समेत जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली पर प्रश्र चिन्ह लग रहा है।
जानकारी अनुसार नारायणगंज ब्लाक के ग्राम पोतला में विगत तीन माह बाद ग्रामीणों को राशन दुकान से अनाज मिला। जिसमें ग्रामीणों ने राशन दुकान से चावल लेकर आए। ग्रामीणों ने बताया कि जब उन्होंने राशन दुकान से मिले चावल को पकाया तो वह सामान्य चावल की तरह नहीं दिख रहे थे। उबालने पर चावल आपस में चिपक जा रहे थे और उनकी बनावट भी अलग थी। कई ग्रामीणों ने इन चावलों को पानी में धोने पर तैरने की बात भी कही है, जो प्लास्टिक के चावल की पहचान मानी जाती है। पोतला गांव के एक ग्रामीण ने बताया हमें सरकार की तरफ से जो राशन मिल रहा है, वह खाने लायक नहीं है। यह चावल प्लास्टिक जैसे लग रहे हैं और इन्हें खाकर बीमार पडऩे का डर है।
बताया गया कि ग्रामीणों के बीच इस फोर्टीफाइड चावल का प्रचार प्रसार नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीणों को मिले चावल को गुणवत्ताविहीन और प्लास्टिक का कह रहे है। शिकायत मिलने पर जब नवभारत की टीम ग्राम पोतला पहुंची तो ग्रामीणों का हूजुम लग गया। जहां एकत्र ग्रामीणों ने बताया कि तीन माह का राशन मिला है, सभी को मिले चावल में प्लास्टिक जैसा चावल की मिलावट है। उन्होंने कहां कि इसकी शिकायत सोसायटी में की थी, लेकिन उन्होंने कहां ऊपर से जो अनाज आया है, वहीं हम वितरित कर रहे है।
बताया गया कि राशन दुकान से मिले चावल को ग्रामीणों ने उसमें मिले फोर्टीफाइड चावल का एक-एक दाना चुनकर अलग कर दिया है। ग्रामीणों का कहना था कि यह चावल खाने में सही तरीके से पक नहीं रहा है। आग में जलाने से प्लास्टिक जैसा जलता है। दांतों में भी चिपक रहा है। जिसके कारण बीमार होने का डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने गुणवत्तायुक्त चावल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे है।
ग्रामीणों में पोषण के प्रति जागरूकता का अभाव
जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में सरकार द्वारा वितरित किए जा रहे पोषण युक्त चावल को लेकर ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति है। जागरूकता के अभाव में ग्रामीण इस चावल को प्लास्टिक का चावल बताकर इसका सेवन करने से कतरा रहे हैं, जिससे पोषण अभियान को बड़ा झटका लग रहा है। बताया गया कि शासन द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य की दुकानों से गरीबों को वितरित किए जा रहे पोषण युक्त चावल को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैल गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह चावल प्लास्टिक से बना है और इसे खाने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी डर के कारण कई ग्रामीण इसे फेंक रहे हैं या जानवरों को खिला रहे हैं।
ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सकी सही जानकारी
बताया गया कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा ग्रामीणों को पोषण युक्त चावल के फायदों और उसकी पहचान के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। पोषण युक्त चावल सामान्य चावल में फोर्टीफाइड राइस कर्नेल मिलाकर तैयार किया जाता है, जो विटामिन और खनिजों से भरपूर होता है। यह कुपोषण से लडऩे में सहायक होता है, लेकिन इसकी सही जानकारी ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाई है। जिसके कारण ग्रामीण इस पोषण युक्त चावल का महत्व समझ नहीं पा रहे है।
इनका कहना है
हमें तीन माह का चावल मिला है, इस चावल में 20 प्रतिशत प्लास्टिक का चावल है, जिसे आग में जलाने पर प्लास्टिक की तरह पिघलता है, और सही चावल नहीं पिघलता है, इस तरह का चावल राशन दुकान से मिल रहा है। जिसे खाने से स्वास्थ्य खराब होने का डर बना हुआ है।

मुकेश कुमार मरकाम, ग्राम पोतला
ग्राम पोतला में तीन माह का जो राशन मिला है, उसमें दो प्रकार का चावल मिला है, एक चावल तो सही है, लेकिन दूसरा चावल प्लास्टिक की तरह लग रहा है। प्लास्टिक जैसा चावल को पकाने में पक नहीं रहा है। इस चावल की जानकारी नहीं दी गई है, क्या यह चावल कैसा है।
चावल को जैसे धोते है, वह चावल ऊपर आ जाता है। इस चावल को खाने पर दांतों में चिपकता है, जैसे प्लास्टिक चिपकता है, राशन दुकान से मिलने वाले चांवल की जांच की जानी चाहिए कि चांवल कैसा है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर कोई वितरित प्रभाव ना पड़े।













