चिलचिलाती धूप में बच्चे, बूढ़े और महिलाएं पानी के लिए कर रहे जद्दोजहद
- पोड़ी गांव में भीषण जल संकट
- प्यास से एक दर्जन मवेशियों की मौत
- 1800 की आबादी एक बोर के भरोसे
- 20 साल बाद सूखा जलाशय
- रिश्ते आने भी बंद, नल-जल योजना बनी शोपीस
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले भर में भीषण गर्मी के साथ जल संकट लगातार गहराता जा रहा है, जिसका खामियाजा अब मवेशियों को भी भुगतना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी का असर निवास जनपद पंचायत के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र मनेरी से लगे ग्राम पंचायत पोड़ी का है, जहाँ भीषण जल संकट के चलते लगभग एक दर्जन मवेशियों की प्यास से मौत हो गई है। गांव की लगभग 1800 की आबादी केवल एक बोर के भरोसे है और करीब 20 साल बाद गांव का 35 एकड़ का जलाशय भी सूखने की कगार पर है, जिससे पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

जानकारी अनुसार औद्योगिक क्षेत्र मनेरी से लगे ग्राम पंचायत पोड़ी के वंशिदे गांव से करीब एक किलोमीटर दूर बोर के पानी से अपनी प्यास बुझा रहे है। हमारी टीम ने जब गांव का दौरा किया, तो देखा कि ग्रामीण पानी के लिए किस तरह जद्दोजहद कर रहे हैं। बूढ़े, युवा और महिलाएं चिलचिलाती धूप में पानी भरने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। ग्रामीण पूरन झरिया, भीमसेन, संकेत झरिया, सुनील, जितेंद्र और संतोष झरिया ने बताया कि गांव में नल-जल योजना संचालित है और जल जीवन मिशन के तहत लगभग 226 कनेक्शन भी हैं, लेकिन सप्लाई मुश्किल से पांच से दस मिनट मिल पाती है और कभी-कभी तो कई दिनों तक पानी आता ही नहीं। गांव में बनी पानी की टंकी भी महज शोपीस बनकर रह गई है। हैंडपंप हवा उगल रहे हैं और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं।
20 साल बाद सूखा जलाशय, मवेशी फंस रहे दलदल में
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2004 में बना लगभग 35 एकड़ का जलाशय भी अब सूखने लगा है। जलाशय के बीच में दलदल बन गया है, जिसमें फंसकर कई मवेशी मर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 20 वर्षों बाद ऐसी स्थिति आई है कि जलाशय में पानी न के बराबर बचा है। ग्रामीणों ने बताया कि जलाशय का गेट पूरी तरह क्षतिग्रस्त है, जिससे पानी रुक नहीं पा रहा और गौर नदी में बह जाता है। ग्रामीणों को मजबूरी में गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर एक बोर से पानी लाना पड़ रहा है, जो भी निश्चित समय पर ही चालू होता है। गांव के आधे से ज्यादा लोग औद्योगिक क्षेत्र मनेरी में काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें सुबह ही पानी का इंतजाम करके जाना पड़ता है।
जल संकट से रुक गए रिश्ते
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सांसद निधि से एक और विधायक निधि से एक टैंकर मिला हुआ है, लेकिन पंचायत इन टैंकरों के माध्यम से भी पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। ग्रामीणों ने पंचायत पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव की कुछ महिलाओं ने बताया कि यह समस्या आज की नहीं है, बल्कि जब से उनकी शादी होकर वे गांव आई हैं, तब से यही समस्या है। कुछ महिलाओं ने तो यहां तक बताया कि जल संकट को देखते हुए रिश्ते आने भी बंद हो गए हैं, क्योंकि लोग कहते हैं कि आपके गांव में जल संकट है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षो से पंचायत में आवेदन, निवेदन कर रहे है। वहीं विगत दिनों उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी समस्या से अवगत कराया, लेकिन इस समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यहां सिर्फ वोट की राजनीति है, वोट लेने के लिए आते है, इसके बाद यहां के लोगों से इनका कोई सरोकार नहीं है। ग्रामीण अब उग्र आंदोलन की तैयारी में हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समस्या का हल नहीं होता है तो वे आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इनका कहना है
बोर में अचानक से जलस्तर कम होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है। जल जीवन मिशन की योजना पानी की टंकी पंचायत को हैंडओवर नहीं हुई है, वह पीएचई विभाग के हैंडओवर में है। इसकी जानकारी मैंने उच्च अधिकारी को दी है।
बल सिंह उईके
सचिव, ग्राम पंचायत पोड़ी
हमारे द्वारा क्षेत्र के सभी जलाशयों का मेंटेनेंस कार्य बरसात से पहले कराया जा रहा है। ग्राम पोड़ी के जलाशय के गेट का भी मेंटेनेंस किया जाएगा जिससे पानी का ठहराव हो सके।
निपेंद्र सिंह
अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन, निवास
हमने गांव का निरीक्षण किया है। सभी जगह जलस्तर कम होने की वजह से दिक्कत आ रही है। जो जलाशय के पास बोर है, उसमें पाइप और बढ़ाएंगे जिससे उसी बोर से व्यवस्थित नल-जल योजना की सप्लाई हो सके।
गरिमा मरकाम
एसडीओ, पीएचई विभाग, निवास
मेरी शादी को लगभग 42 वर्ष हो गए, हमेशा पानी की ही समस्या रही है, अब हम खुद पानी पीए की मवेशी को पिलाए, कपड़े धोना भी रहता है अगर समस्या का हल नहीं हुआ तो निवास मुख्यालय में जाकर आंदोलन करेंगे।
हीरा बाई, ग्रामीण महिला
गांव में जल संकट है पानी की टंकी विभाग ने पंचायत के हैंडओवर नहीं की इतना ही नहीं सन 2004 में बना जलाशय भी अब सूखने लगा है लगभग 20 वर्षों बाद ऐसी स्थिति देखने को मिली है गेट भी टूटे हुए है जलाशय के वही गांव में लगभग एक दर्जन मवेशी भी मर गए हैं समस्या का हल नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे।
पूरन झरिया, ग्रामीण
गांव में बहुत ज्यादा पेयजल की समस्या है। भीषड़ गर्मी में हम पानी के लिए परेशान है, हमारे यहां अब तो रिश्ते भी नहीं आ रहे है, जहां से रिश्ते आते है, वे कहते है कि आपके यहां जल संकट है। रिश्ता कैसे जोड़े। इस समस्या का निराकरण कराए, इसके बाद रिश्ता जोड़ेगे।
शांति झरिया, ग्रामीण महिला
हमारे घर वालों ने अच्छा घर देखकर शादी की थी, लेकिन यहां तो भीषण जल संकट है दिन भर पानी के लिए परेशान हो रहे हैं, एक गांव में जलाशय था वह भी सूखने लगा है, हम बीमार तक हो जाते है अगर समस्या का हल नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे।
मनीषा झरिया, ग्रामीण महिला
रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे


















