मृत्यु के बाद भी मरने वाले की आंखे दुनिया देख सकती है

रोशनी के अग्रदूत, नारायणगंज सीएचसी के आठ स्वास्थ्य कर्मी बने नेत्रदान के प्रेरणा स्रोत

  • मृत्यु के बाद भी मरने वाले की आंखे दुनिया देख सकती है
  • नारायणगंज में अनुकरणीय पहल 19 लोगो ने किया नेत्रदान

मंडला महावीर न्यूज 29. मानवता की सेवा का जज्बा केवल अपने कर्तव्यों तक सीमित नहीं, बल्कि उससे कहीं आगे बढ़कर समाज को नई दिशा दे सकता है, इसका जीवंत उदाहरण नारायणगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के 08 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने प्रस्तुत किया है। इन सातो ने मरणोपरांत नेत्रदान करने का संकल्प लेकर न सिर्फ अपनी महानता का परिचय दिया है, बल्कि अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया है। यह पहल नारायणगंज क्षेत्र में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। बताया गया कि वर्ष 2024-25 में जिले से 51 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा है। जिसमें नारायणगंज में 19, नैनपुर में 16, बम्हनी में 8, बिछिया में 5, बीजाडांडी में 3 लोंगो ने नेत्रदान करने का संकल्प लिया है।

जानकारी अनुसार जिले में दानदाताओं की कमी नहीं है। पहले भी कुछ लोगों ने अपनी मारने के बाद देह तक दान कर चुके हैं, जो मेडिकल में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं की शिक्षा के काम आती है। जिला स्तर में नेत्र दान की व्यवस्था है। कोई भी इच्छुक व्यक्ति जिला अस्पताल पहुंचकर नेत्रदान कर सकता है। 2010 से अब तक 440 लोगों ने नेत्र दान के लिए सहमति दी है, लेकिन जागरूकता के अभाव में यह संख्या पर्याप्त नहीं है। 2023-24 की बात करें तो मात्र एक महिला ने ही नेत्र दान के लिए आवेदन दिया है। इससे जरूरतमंद के आंखों की रोशनी लौटने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2024-25 में 51 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है।

नेत्र चिकित्सा सहायक जयकरण चौधरी ने बताया कि नारायणगंज ब्लाक में वर्ष 2024-25 में 19 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है। इन 19 नेत्रदाताओं में नारायणगंज सीएचसी के आठ समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों ने यह सराहनीय कदम उठाया है, उनमें टीबी विभाग से सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर देवेंद्र साहू, ब्लॉक एक्सटेंशन एजुकेटर विजय मरावी, लैब टेक्नीशियन कैलाश सोनी, मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरेंद्र सिंह, नर्सिंग आफिसर पिंकी बरमैया, एएएम जानकी मरावी, स्टाफ से छाया चौहान, गीता हताले शामिल हैं। इन सभी ने अपनी मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने की प्रतिज्ञा ली है, जिससे किसी और को दुनिया देखने का मौका मिल सके।

मृत्यु के बाद किसी के जीवन को मिल सकती है रोशनी 

यह नेत्रदान केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि नारायणगंज सीएचसी के स्वास्थ्य विभाग में सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक है। देवेंद्र साहू जो टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ने कहा कि हमने यह कदम इसलिए उठाया ताकि हमारी मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी आ सके। यह सबसे बड़ा दान है जो कोई कर सकता है। बीईई विजय मरावी ने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए कहा हमारा काम लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। नेत्रदान भी इसी जागरूकता का एक हिस्सा है। हमें उम्मीद है कि हमारे इस कदम से और लोग प्रेरित होंगे।

नेत्रदान किसी के जीवन में ला सकता है उजाला 

लैब टेक्नीशियन कैलाश सोनी ने बताया कि उन्होंने हमेशा से नेत्रदान के बारे में सोचा था और अब उन्हें इसे पूरा करने का अवसर मिला है। डॉ. सुरेंद्र सिंह ने इस पहल को चिकित्सा पेशे के मूल्यों के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक के रूप में हम जीवन बचाने और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नेत्रदान भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जो किसी के जीवन में उजाला लाता है। नारायणगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन ने भी अपने कर्मचारियों के इस नेक कार्य की सराहना की है। केंद्र के सीबीएमओ डॉ. अमृत लाल कोल ने कहा कि हमारे कर्मचारियों ने जो किया है, वह बेहद प्रेरणादायक है और दूसरों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करेंगा।

जैन समाज आया था आगे 

नेत्र दान के लिए वैसे व्यक्तिगत रूप से लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। 2010 से 2024 तक 389 नेत्र दान काफी कम है। इसमें भी 108 नेत्र दाता जैन समाज के एक शिविर में आगे आए थे। सिंतबर 2017 में पिंडरई में शिविर लगाया गया था। जिसमें 108 लोगों ने नेत्रदान किया था। इस तरह समाजिक रूप से बड़ी संख्या में नेत्र दान के लिए लोगों को पेरित भी नहीं किया जा रहा है। लोगों के मन में आज भी भ्रांतियां जिसके कारण लोग अंग दान से पीछे हटते हैं।

ऐसे कर सकते है नेत्रदान 

बताया गया कि नेत्र दान के लिए जिला अस्पताल समेत जिले के किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर परिवार के किसी सदस्य के साथ आवेदन करना होता है। जहां से कुछ नंबर उपलब्ध कराए जाते हैं। मृत्यु के बाद कुछ घंटो का समय नेत्र दान के लिए मिलता है। मृत्यु की सूचना के बाद जिले के चिकित्सक मेडिकल जबलपुर में सूचना देते हैं। 6 घंटे के अंदर आंख को मेडिकल पहुंचना होता है जिससे वहां आंख की प्रतिक्षा कर रहे व्यक्ति को आंख लगाई जा सके। ऑपरेशन सफल रहा तो मरने वाली की आंखें मरने के बाद भी दुनिया देख सकती है।



 

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