आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं ने कहा हम स्वास्थ्य की रीढ़, पर खुद उपेक्षित
- आशा-ऊषा संगठन ने सौंपा ज्ञापन, स्थाईकरण और मानदेय की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश की 85 हजार से अधिक आशा और ऊषा कार्यकर्ताएं जो वर्षों से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला बनी हुई हैं, आज भी उचित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। इसी मुद्दे को लेकर आशा-ऊषा महिला संगठन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम मंडला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि कार्यकर्ता टीकाकरण, प्रसव सहायता, आयुष्मान कार्ड बनवाने, मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और गंभीर बीमारियों की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। बावजूद इसके उन्हें केवल नाममात्र की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जो उनकी आजीविका चलाने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर निस्वार्थ सेवा की, लेकिन अब तक उन्हें न तो नियमित वेतन मिला है और न ही स्थायी कर्मचारी का दर्जा।
संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं को उनके कार्य के अनुसार स्थायित्व प्रदान किया जाए, उचित वेतन दिया जाए, सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त राशि का प्रावधान हो, स्मार्ट फोन और इंटरनेट सुविधा मिले, किराया भत्ता दिया जाए और दुर्घटना की स्थिति में उन्हें विभागीय सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके साथ ही उन्हें गैर-स्वास्थ्य विभागीय कार्यों से मुक्त करने की भी अपील की गई है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानती है, तो अब समय आ गया है कि उन्हें वह सम्मान, आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा दी जाए, जिसकी वे वास्तव में हकदार हैं।









