परिवार से बहिष्कृत बैगा बच्चों का हुआ पुनर्वास
- कलेक्टर के मार्गदर्शन में बाल कल्याण समिति ने दिया नया जीवन
- बैगा बालक आश्रम में प्रवेश हुआ सुनिश्चित
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले में बाल कल्याण समिति ने देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के विकास, सुरक्षा, उपचार और पुनर्वास के लिए एक सराहनीय कार्य किया है। मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में बाल कल्याण समिति ने बैगा जनजाति के दो बच्चों को रेस्क्यू करने के दो महीने बाद सफलतापूर्वक आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया है।
जानकारी के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में बैगा जनजाति के इन दो बच्चों को उनके अभिभावकों द्वारा माहिष्मती घाट मंडला में छोड़ दिया गया था। सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति अध्यक्ष गजेंद्र गुप्ता और सदस्य रंजीत कछवाहा ने विभागीय टीम के सहयोग से बच्चों को रेस्क्यू किया और आदर्श बाल गृह पहुंचाया। बच्चों के जैविक माता-पिता की जानकारी जुटाई गई और विशेष किशोर पुलिस इकाई के माध्यम से माता को बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित कराया गया।
बताया गया कि परामर्श के दौरान यह सामने आया कि माता-पिता अत्यधिक शराब का सेवन करते थे और आपस में लड़ते थे, जिसके कारण वे बच्चों के लालन-पालन के प्रति बेहद लापरवाह थे। पहले भी वे बच्चों को घर से निकाल चुके थे। मार्च के पहले सप्ताह में उन्होंने बच्चों को गाली-गलौज कर दोबारा घर न आने की चेतावनी के साथ माहिष्मती घाट पर छोड़ दिया था। दो-तीन दिन से भूखे-प्यासे इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू के समय एक बच्चे की आंखों में गंभीर संक्रमण था, जिसका पहले शासकीय चिकित्सालय में और फिर बाल कल्याण समिति की पहल पर एक निजी नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा उपचार कराया गया, जिससे बच्चे को काफी राहत मिली।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष गजेंद्र गुप्ता, सदस्य तृप्ति शुक्ला, रंजीत कछवाहा, शशि पटेल और संतोष कुमार यादव ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए जनजातीय कार्य विभाग से समन्वय किया। बैगा बालक आश्रम में प्रवेश के लिए आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के बावजूद बाल कल्याण समिति, बाल गृह और प्रशासनिक अमले की संवेदनशीलता के कारण सभी दस्तावेज समय पर तैयार हो गए। बैगा बालक आश्रम ने नवीन सत्र में बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया और वे ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण में शामिल भी हुए। बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया में एसडीएम मंडला सोनल सिडाम, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य वंदना गुप्ता और उनके अधीनस्थ अमले ने रेस्क्यू से लेकर प्रवेश तक बाल कल्याण समिति को संवेदनशीलता के साथ सहयोग प्रदान किया। बाल कल्याण समिति और प्रशासनिक अमले ने बच्चों की पहचान उजागर नहीं होने दी।
बाल कल्याण समिति का ये है कार्य
बाल कल्याण समिति भारत में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत गठित एक स्वायत्त संस्था है। इसका मुख्य कार्य उन बच्चों से संबंधित शिकायतों का समाधान करना है जिन्हें देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है। इन बच्चों में वे शामिल होते हैं जो त्याग दिए गए हैं, अनाथ हैं, माता-पिता द्वारा स्वेच्छा से दिए गए हैं, या खो गए हैं। बाल कल्याण समिति ऐसे बच्चों के विकास, सुरक्षा, उपचार और पुनर्वास से संबंधित मुद्दों पर कार्य करती है।










